गोदी मीडिया ने नोएडा और मानेसर के मज़दूर आन्दोलन को ग़ैर-क़ानूनी बनाकर पेश करने के लिए कैसी घृणित चालें चलीं?
नोएडा व मानेसर के मज़दूर आन्दोलनों को आपराधिक व ग़ैर-क़ानूनी बनाने का गोदी मीडिया ने पुरज़ोर प्रयास किया। उसके कार्यकर्ताओं पर तरह-तरह के लांछन लगाकर उन्हें कलंकित करने की हर सम्भव कोशिश इस दलाल मीडिया ने की। लेकिन जनता के बीच इसका उल्टा असर हुआ। जनता के सामने यह पहले से भी ज्यादा साफ़ हो गया कि सत्यम, रूपेश, आदित्य, हिमांशु, सृष्टि, आकृति और मनीषा का गुनाह सिर्फ़ इतना था कि उन्होंने जनता का पक्ष चुना, कि उन्होंने न्याय का पक्ष चुना और इसी की सज़ा योगी सरकार और उसकी पुलिस उन्हें दे रही है। यही वजह है कि 11 अप्रैल के बाद दो सप्ताह के भीतर ही गोदी मीडिया नोएडा मज़दूर आन्दोलन और उसके गिरफ्तार मज़दूर व सामाजिक कार्यकर्ताओं के मसले पर चुप्पी साध गया है। अगर देश में कोई निष्पक्ष न्यायपालिका है तो उसे समूचे मुख्यधारा मीडिया द्वारा किये जा रहे दुष्प्रचार, अफ़वाहसाज़ी, साम्प्रदायिक उन्माद के प्रचार, फ़ेक न्यूज़ फैलाने की घटिया हरक़तों पर स्वयं संज्ञान लेना चाहिए और ऐसे चैनलों व समाचार प्रतिष्ठानों के प्रबन्धन और दोषी पत्तलकारों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। मतलब, होना तो यही चाहिए। बाक़ी देश के मौजूदा हालात आप सभी को पता हैं।






















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