• June 28, 2026

    बारह साल, जनता बेहाल – टूटे सपनों का अम्बार! कौन है इसका ज़िम्मेदार ?

    एक ऐसे समय में जब जनता कमरतोड़ महँगाई और विकराल बेरोज़गारी की मार झेल रही है, जब देश के छात्र-युवा बरबाद होती शिक्षा व परीक्षा व्यवस्था का नतीजा भुगत रहे हैं, जब देश के अल्पसंख्यक, विशेष तौर पर, मुसलमान साम्प्रदायिक तनाव और विषवमन के शिकार बन रहे हैं, जब स्त्री-विरोधी व दलित-विरोधी अपराध अपने चरम पर हैं, जब देश के ग़रीब छोटे किसान हर रोज़ तबाह हो रहे हैं और आत्महत्याएँ कर रहे हैं, उस समय नरेन्द्र मोदी के प्रधानमन्त्रित्व के 12 साल पूरे होने का भाजपा द्वारा मनाया जा रहा यह जश्न जनता के दुख-दर्द के साथ क्या एक भद्दा मज़ाक और राजनीतिक अश्लीलता की पराकाष्ठा नहीं है?

  • March 30, 2026

    भारतीय शिक्षा व्यवस्था और विज्ञान के विकास की पोल खुल गयी एआई समिट और गलगोटिया यूनिवर्सिटी...

    ऐसा नहीं है कि यह विज्ञान और तर्कणा विरोधी बातें बस बयानबाज़ी तक सीमित हैं। सरकार द्वारा सांस्थानिक रूप से छद्म विज्ञान को बढ़ावा देने की पूरी कोशिश की जा रही है। सरकार द्वारा शिक्षा को लेकर लायी गयी तमाम नितियाँ और उठाये गये सारे क़दम यह साफ़-साफ़ बताते हैं कि कैसे योजनाबद्ध तरीक़े से शिक्षा का निजीकरण किया जा रहा है और इसे बर्बाद किया जा रहा है। छात्रों के तर्क करने की शक्ति पर हमला किया जा रहा है, उनकी आलोचनात्मक क्षमता को बाधित करके उसे सचेतन तौर कुन्द किया जा रहा है, वे सरकार की किसी भी नीति या बात पर सवाल न खड़ा करें, बस चुपचाप अनुशासित होकर फ़ासीवादी सरकार के हुक्म की तामील करें इसके लिए ही उन्हें अवैज्ञानिक और अतार्किक बनाने की पुरज़ोर कोशिश की जा रही है ताकि उन्हें आसानी से फ़ासीवादी उन्मादी भीड़ का हिस्सा बनाया जा सके। पाठ्यक्रम से उद्भव के सिद्धान्त, पीरियॉडिक टेबल आदि विषयों का हटाया जाना, इतिहास का मिथ्याकरण करना आदि इसी दूरगामी फ़ासीवादी परियोजना के परिणाम हैं।

  • March 30, 2026

    फ़ासीवादियों और ज़ायनवादियों की प्रगाढ़ होती एकता!

    नरेन्द्र मोदी द्वारा इज़रायल की यह दो-दिवसीय यात्रा एक ऐसे समय में हुई है जब जेफ़री एपस्टीन जैसे पतित व्यक्ति के साथ भाजपा के नेताओं-मंत्रियों और अम्बानी जैसे पूँजीपतियों की संलिप्तता का मामला सामने आया था। जेफ़री एप्सटीन एक गलीज़ नरभक्षी था और बच्चियों के साथ बलात्कार व यौन अपराध का अन्तरराष्ट्रीय रैकेट चलाता था। उसके घृणित कारनामे न केवल पूँजीवादी समाज की सड़ाँध और गलाज़त को प्रदर्शित करते हैं बल्कि दुनिया भर के शासक वर्गों की पतनशीलता को भी उघाड़ कर रख देते हैं। ऐसे घृणित व्यक्ति के साथ भाजपा के नेताओं और खुद नरेन्द्र मोदी के कथित सम्बन्ध आम जनता के लिए कई सवाल खड़े कर रहे थे। एप्स्टीन 2008 में ही यौन अपराधी साबित हो चुका था, मगर इसके बावजूद 2017 में अनिल अम्बानी, हरदीप सिंह पुरी आदि का एप्सटीन के साथ मेलजोल और अमेरिकी अधिकारियों के साथ मीटिंग्स का कार्यक्रम बनाना किन वज़हों से हो सकता है? क्या यह राजनीतिक व व्यापारिक फ़ायदों के लिए था या फ़िर निजी फ़ायदों के लिए? एप्स्टीन स्वयं एक ज़ायनवादी था और इज़रायली ख़ुफ़िया एजेंसी मोस्साद का एजेण्ट था। उसके साथ रिश्तों की बात सामने आने पर दुनिया के कई रसूख़दार व्यक्तियों को गिरफ़्तार किया गया है और कई से उनके पदों से इस्तीफ़े ले लिये गये हैं। सिर्फ़ डोनाल्ड ट्रम्प का अमेरिका और मोदी का भारत ही ऐसे देश हैं, जहाँ एप्सटीन फ़ाइलों में नाम आने के बाद भी किसी पर कार्रवाई तो दूर, जाँच की भी घोषणा नहीं की गयी है। सवाल है कि 2008 में एप्स्टीन की घिनौनी असलियत दुनिया के सामने आने के बाद भी भाजपा के नेताओं की बातचीत ऐसे घृणित, बलात्कारी व्यक्ति के साथ क्यों हो रही थी?

  • March 30, 2026

    ईरान पर अमेरिका-इज़रायल द्वारा थोपा गया साम्राज्यवादी युद्ध अमेरिकी साम्राज्यवाद और इज़र...

    ईरान युद्ध विश्व की राजनीति में एक नयी करवट की ओर ले जा रहा है। इस युद्ध के बाद साम्राज्यवाद के वैश्विक समीकरणों में निश्चित ही परिवर्तन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इससे सर्वाधिक फ़ायदा रूस-चीन साम्राज्यवादी धुरी को मिलेगा और सबसे ज़्यादा नुक़सान अमेरिका-ब्रिटेन धुरी व यूरोपीय संघ धुरी को होगा। पश्चिमी साम्राज्यवाद की दोनों ही धुरियों के बीच की और उनकी आन्तरिक एकता भी भयंकर दबाव में है। नतीजतन, आने वाले समय में साम्राज्यवाद का राजनीतिक संकट और गहरायेगा और कालान्तर में इससे भी बड़े युद्धों को जन्म देगा। ये युद्ध पूरी दुनिया में ही जनता के लिए भयंकर स्थितियाँ पैदा करेंगे लेकिन विशेष तौर पर सापेक्षिक रूप से पिछड़े पूँजीवादी देशों में जनअसन्तोष बेहद तेज़ी से बढ़ेगा। क्रान्तिकारी शक्तियों को इस आने वाले समय की तैयारी तत्काल करनी होगी। मज़दूर वर्ग के हिरावल को आने वाले उथल-पुथल के लिए अपने आपको तैयार करना होगा।

  • March 30, 2026

    पूँजीवादी व्यवस्था और युवा आबादी को अनियमित व अनौपचारिक क्षेत्र में धकेले जाने की बाध्यता

    इस रिपोर्ट से तीन बातें बहुत स्पष्ट हैं। पहला, युवा आबादी के लिए पक्के व नियमित रोज़गार के अवसर तेज़ी से घटते जा रहे हैं। युवाओं को अनियमित और अनौपचरिक क्षेत्रों में काम के लिए धकेला जा रहा है। दूसरे, देश में अलग-अलग राज्यों के स्तर पर रोज़गार सृजन में बहुत असमानता है। तीसरे, कार्यस्थल तथा रिहाइश में दूरी के चलते आवागमन काम के समय में अतिरिक्त समय का बोझ बढ़ा देता है।