नौसेना विद्रोह (18-23 फ़रवरी, 1946)-एक ज्वलन्त इतिहास
आज भले ही बिकाऊ पूँजीवादी मीडिया के घटाघोप में ये घटनाएँ विस्मृति के गर्त में समा गयी हों, लेकिन इस देश की मेहनतकश आवाम के लिए अपने शूरवीरों की कुर्बानियों की याददिहानी बेहद ज़रूरी है। शाही नौसेना का विद्रोह हमारे स्वाधीनता संग्राम की एक महत्वपूर्ण घटना थी। इसके इतिहास से पता चलता है कि वास्तविक संघर्ष संगठित होने पर अंग्रेजों और देशी बुर्जुआ नेताओं की धुकधुकी कैसे बढ़ जाती थी। प्रख्यात इतिहासकार सुमित सरकार के अनुसार ‘‘आज़ाद हिन्द फौज के जवानों के ठीक विपरीत शाही नौसेना के इन नाविकों को कभी राष्ट्रीय नायकों जैसा सम्मान नहीं मिला, यद्यपि उनके कारनामों में कुछ अर्थों में आज़ाद हिन्द पफ़ौज के फौजियों से कहीं अधिक ख़तरा था। जापानियों के युद्धबन्दी शिविर की कठिनाई भरी ज़िन्दगी जीने से आज़ाद हिन्द फौज में भरती होना कहीं बेहतर था।’’















Recent Comments