• January 24, 2026

    मुनाफ़ाख़ोर पूँजीवादी व्यवस्था, फ़ासिस्ट सरकार और पानी में फैलता ज़हर

    केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड (CGWB) की 2025 की रिपोर्ट बताती है कि भारत में लगभग 20 प्रतिशत भूजल ऐसा है जिसमें नाइट्रेट, यूरेनियम और आर्सेनिक जैसे ख़तरनाक तत्व पाए गए हैं। यह रिपोर्ट बताती है कि देशभर में पानी को प्रदूषित करने वाला सबसे बड़ा केमिकल कैल्शियम बाई कार्बोनेट (CaHCO3) है। इस रिपोर्ट के मुताबिक़, साल 2023 में कुल 15259 सैम्पल लिए गए। इनमें से 20.7 प्रतिशत सैम्पल में नाइट्रेट की मात्रा BIS के मानक यानी 45 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज़्यादा थी।  भारत के 56 प्रतिशत जिले ऐसे हैं जहाँ के भूजल में नाइट्रेट की मात्रा सुरक्षित से ज़्यादा है। राजस्थान, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में यह मात्रा काफी ज़्यादा है। पश्चिम बंगाल, झारखण्ड , बिहार, उत्तर प्रदेश, असम और मणिपुर राज्यों के सैम्पल में आर्सेनिक पाया गया। देश के 263 जिले ऐसे हैं जहाँ के भूजल में फ्लोराइड तक पाया गया।

  • December 30, 2025

    ‘चार लेबर कोड’ मज़दूरों-कर्मचारियों के अधिकारों पर सबसे बड़ा हमला है! अब एकदिवसीय हड़तालों ...

    अपने तीसरे कार्यकाल के दौरान मोदी सरकार खुलकर उन सभी कार्यभारों को पूरा कर रही है जिनके लिए देश के पूँजीपति वर्ग ने सत्ता की कमान उसके हाथ में सौंपी थी। आर्थिक मन्दी से बिलबिलाया हुआ पूँजीपति वर्ग लम्बे समय से “धन्धे की आज़ादी” के लिए किलबिला रहा था। वही “आज़ादी” मोदी सरकार ने चार लेबर कोड की शक्ल में मालिकों और पूँजीपतियों को बतौर सौगात थमायी है। देश के करोड़ों मज़दूरों-कर्मचारियों की बदहाल ज़िन्दगी को और भी तबाह करने वाले चार ख़तरनाक लेबर कोड मोदी सरकार पिछले महीने लागू कर चुकी है। 21 नवम्बर को अचानक एक अधिसूचना जारी करके सरकार ने इसकी घोषणा कर दी। यह फ़ासीवादी मोदी सरकार द्वारा मज़दूरों और कर्मचारियों के अधिकारों पर अबतक का सबसे बड़ा हमला है।

  • December 30, 2025

    शान्ति (SHANTI) विधेयक, 2025 – कॉरपोरेट मुनाफ़े के लिए मानव जीवन को ख़तरे में डालने का बेशर्म दस्ता...

    बड़े पैमाने पर होने वाले परमाणु रिसाव, कचरे का अनुचित प्रबन्धन व निपटारा तथा परमाणु संचालन से जुड़े अन्य बड़े जोख़िम वाले कारकों से होने वाली आपदाओं को छिपाने, उन्हें कम करके दिखाने और उनकी ज़िम्मेदारी से पूँजीपतियों और निजी प्रतिष्ठानों को मुक्त करने की मंशा से ही यह विधेयक मूलतः संचालित है। जैसे-जैसे आप इस विधेयक को पढ़ेंगे तो पायेंगे कि यह पूरा क़ानून इस अत्यन्त ख़तरनाक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निजी और विदेशी भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए बनाया गया है। वहीं दूसरी तरफ़ सार्वजनिक सुरक्षा सम्बन्धी चिन्ताओं को पूरी तरह से नज़रअन्दाज़ कर दिया गया है। यह विधेयक पूरी निर्माण श्रृंखला यानी खनन से लेकर संयंत्र संचालन और कचरा प्रबन्धन तक के लिए एक ही लाइसेंस की अनुमति देता है। इससे निजी कम्पनियाँ बिना किसी वास्तविक जवाबदेही और दण्ड से मुक्त रहते हुए अधिकतम मुनाफ़ा कमा सकती हैं।

  • November 30, 2025

    सोवियत संघ में समाजवाद की युगान्तरकारी उपलब्धियाँ

    समाजवाद का लक्ष्य सिर्फ़ भौतिक प्रगति के नये शिखरों तक पहुँचना नहीं था, बल्कि न्याय, समानता और पूरी आबादी की (भौतिक मुक्ति के साथ ही) आत्मिक मुक्ति के साथ-साथ भौतिक प्रगति हासिल करना था। इसके लिए ज़रूरी था कि निजी स्वामित्व की व्यवस्था के साथ ही वह उसके एक प्रमुखतम स्तम्भ पर, यानी पितृसत्तात्मक पारिवारिक ढाँचे पर भी चोट करे, चूल्हे-चौखट की दमघोंटू नीरस दासता से स्त्रियों को मुक्त करे, उन्हें पुरुषों के साथ वास्तविक बराबरी का दर्जा देते हुए सामाजिक उत्पादक गतिविधियों और राजनीतिक-सामाजिक दायरों में भागीदारी का भौतिक-वैचारिक आधार तैयार करे तथा इसके लिए पुरुष वर्चस्ववादी मूल्यों-मान्यताओं-संस्थाओं की जड़ों पर कुठाराघात करे।

  • October 30, 2025

    ‘आई लव मुहम्मद’ विवाद और उसका फ़ासीवादी साम्प्रदायिक इस्तेमाल

    कानपुर में मुस्लिमों पर एकतरफ़ा कार्यवाई के बाद पुलिस ने सफ़ाई देते हुए कहा कि यह कार्यवाई ‘आई लव मुहम्मद’ पर नहीं बल्कि नई परम्परा शुरू करने और माहौल ख़राब करने के लिए की गयी है।  लेकिन सवाल यह है कि माहौल ख़राब करने में हिन्दू संगठन के लोग भी ज़िम्मेदार थे लेकिन उन पर कोई कार्यवाई क्यों नहीं हुई? अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार पोस्ट डालना कैसे गुनाह हो गया? बजरंग दल से लेकर कई कट्टरपंथी हिन्दू संगठनों ने ‘आई लव महादेव’ से लेकर ‘आई लव योगी’ तक के पोस्टर, बैनर लगाये और सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली। लेकिन तब इस “नई परम्परा” पर कोई कार्यवाई नहीं हुई। सोशल मीडिया पर मुस्लिम-विरोधी साम्प्रदायिक पोस्ट की बाढ़ आ गयी लेकिन इस पर भी कोई कार्यवाई नहीं हुई। हाथरस में एक प्रदर्शन में तो ‘आई लव यूपी पुलिस’, ‘आई लव योगी’ और ‘आई लव महादेव’ के बैनर लेकर लोग नारे लगा रहे थे- ‘यूपी पुलिस तुम लट्ठ बजाओ, हम तुम्हारे साथ हैं’! क्या इससे माहौल ख़राब नहीं होता?