मोदी सरकार द्वारा ग्रामीण रोज़गार गारण्टी क़ानून (मनरेगा) को ख़त्म करने की चाल को नाकाम करो!
मनरेगा को समाप्त करना और कृषि के पीक सीज़न में 60 दिनों की तथाकथित ‘काम बन्दी’ लागू करना, दरअसल धनी किसानों और ग्रामीण पूँजीपति वर्ग को सस्ते मज़दूरों की निरन्तर सप्लाई सुनिश्चित करने की योजना है। तथ्य यह साबित करते रहे हैं कि मनरेगा के चलते ग्रामीण मज़दूरों की सौदेबाज़ी की ताक़त बढ़ी थी और वे दिहाड़ी मज़दूरी को लेकर बेहतर मोल-भाव कर पा रहे थे। लेकिन मनरेगा के ख़त्म होने से और 60 दिनों के ‘कार्य बन्दी’ के बाद बेरोज़गार मज़दूरों को मजबूरी में कम मज़दूरी पर काम करने के लिए बाध्य किया जायेगा। यही मोदी सरकार की वास्तविक मंशा है—ग्रामीण और शहरी श्रम बाज़ार को पूँजीपतियों के पक्ष में पूरी तरह झुका देना।






















