उत्तर प्रदेश में एसआईआर का खेल और डिटेंशन कैम्प बनाने की फ़ासिस्ट साज़िश
आम मेहनतकश आबादी, ग़रीब दलित, मुसलमानों, स्त्रियों, प्रवासी मज़दूरों, झुग्गियों और सड़कों पर रहने वाली और घुमन्तू आबादी का एक बड़ा हिस्सा इस साज़िश का शिकार होगा। एक बड़ी आबादी जिसका नाम एसआईआर के ज़रिये काटा जायेगा उसके लिए अपनी नागरिकता को साबित करना मुश्किल होगा। उन्हें डिटेंशन कैम्पों में ठूँस दिया जायेगा। यह आबादी न तो यह साबित कर पायेगी कि वह बांग्लादेश की या किसी और देश की है और न ही उनकी कोई वापसी होगी। उन्हें मताधिकार आदि से वंचित कर दोयम दर्जे के नागरिक के तौर पर इन डिटेंशन कैंपों में रखा जायेगा। वैसे तो चार लेबर कोड के लागू होने के बाद तो हर कारखाना-फ़ैक्ट्री डिटेंशन कैम्प जैसे ही होंगे। लेकिन इस डिटेंशन कैंप में रहने वाले लोगों के कोई नागरिक अधिकार नहीं होंगे। उन्हें अम्बानी-अदानी के कारखानों में जानवरों से बदतर हालात में खटाया जायेगा। यानी अपने देश के नागरिकों को ही नागरिकता से वंचित कर फ़ासिस्ट उन्हें अपने “असली नागरिक” यानी अम्बानी-अदानी जैसे पूँजीपतियों की ग़ुलामी में लगा देंगे!






















