अय्यंकालि के जन्मदिवस पर
28 अगस्त को अय्यंकालि का 157वां जन्मदिवस है। कई जाति-विरोधी व्यक्तियों को खुद भारत की सरकार ने आज़ादी के बाद से ही प्रचारित-प्रसारित किया है लेकिन अय्यंकालि को नहीं। क्यों? क्योंकि अय्यंकालि आमूलगामी तरीके से और जुझारू तरीके से सड़क पर उतरकर संघर्ष का रास्ता अपनाते थे; क्योंकि अय्यंकालि सरकार की भलमनसाहत या समझदारी के भरोसे नहीं थे, बल्कि जनता की पहलकदमी पर भरोसा करते थे। यही कारण है कि सरकार अय्यंकालि के जन्मदिवस पर कोई समारोह नहीं करती, कोई छुट्टी घोषित नहीं करती, उनकी तस्वीरें जगह-जगह नहीं लगायी जातीं और न ही उनकी प्रतिमाएँ खड़ी की जाती हैं। अय्यंकालि के रास्ते और विचारों के इस पक्ष को हमसे बचाकर रखती है। क्योंकि यदि मेहनतकश दलित और दमित जनता उनके बारे में जानेगी, तो उनके रास्ते के बारे में भी जानेगी और यह मौजूदा पूँजीवादी व जातिवादी सत्ता ऐसा कभी नहीं चाहेगी कि उसके विरुद्ध रैडिकल संघर्ष के रास्ते को जनता जाने और अपनी पहलकदमी में भरोसा पैदा करे। यही कारण है कि अय्यंकालि की विरासत को जनता की शक्तियों को याद करना चाहिए। उनकी स्मृतियों को प्रगतिशील ताक़तों को बचाकर रखना चाहिए।
मज़दूर बिगुल, अगस्त 2026














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