नोएडा की एक फ़ैक्ट्री में लगी भीषण आग : फ़ैक्ट्री मालिकों को बचाने में लगा पुलिस-प्रशासन और गोदी मीडिया हुआ बेनक़ाब
नोएडा की इस फ़ैक्ट्री में हुई इस घटना ने न सिर्फ़ नोएडा की फ़ैक्ट्रियों में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है बल्कि साथ ही पुलिस, प्रशासन और इस पूँजीवादी मीडिया की हक़ीक़त भी बयान कर दी है। इस फ़ैक्ट्री में काम कर रहे सभी मज़दूर ठेके पर थे, जिन्हें अलग-अलग ठेकेदारों द्वारा भर्ती किया जाता था। उनकी तनख्वाह 10-12 हज़ार रुपये ही थी। यहाँ 12-12 घण्टे की दो शिफ़्ट चलती थीं। ओवरटाइम का भुगतान भी डबल रेट से नहीं करके सिंगल रेट से ही किया जाता था। कम्पनी ने सुरक्षा व्यवस्था के सारे नियमों को दरकिनार करते हुए तमाम सुरक्षा उपकरणों को बाईपास कर रखा था। ऐसे में यह लाज़मी था कि कोई भी घटना होने पर मज़दूरों की जान को ख़तरा हो सकता था।























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