कॉकरोच जनता पार्टी और उसकी लोकप्रियता : भारतीय जनता में व्यवस्था और मौजूदा सरकार के प्रति बढ़ते गुस्से व असन्तोष और साथ ही विकल्पहीनता की अभिव्यक्ति
कॉकरोच जनता पार्टी की अचानक बढ़ी भारी लोकप्रियता के पीछे मुख्य कारण यह है कि हमारे देश का शासक वर्ग, उसकी राज्यसत्ता और उसके विभिन्न अंग-उपांग मेहनतकश जनता की तक़लीफ़ों के प्रति आश्चर्यजनक असंवेदनशीलता दिखा रहे हैं और उनका रवैया काफ़ी हद तक पुराने फ्रांस की रानी मैरी एन्त्वानेत जैसा हो चुका है जिसने पूछा था कि “अगर जनता के पास खाने के लिए रोटी नहीं है, तो वह केक क्यों नहीं खा लेती?” उसी प्रकार, भूख और कुपोषण की कगार पर खड़ी भारी बहुसंख्यक मेहनतकश और आम मध्यवर्गीय आबादी को बताया जा रहा है कि “सब चंगा सी”, “मेलोडी खाओ खुद जान जाओ”, “देश शान्ति और विकास के पथ पर अग्रसर है”, आदि। वहीं दूसरी ओर, खाता-पीता उच्च मध्य वर्ग और उच्च वर्ग नशे में बुरी तरह से टल्ली है। यह नशा है उपभोक्तावाद, खाऊ-पियू-अघाऊ संस्कृति का जिसमें चूर यह वर्ग निरन्तर “खाओ-पियो-ऐश करो मितराँ” गाने पर उन्मादी नृत्य करता रहता है। उसे न सिर्फ़ सुई से लेकर जहाज़ तक बनाने वाली और हर सेवा पैदा करने वाली जनता के दुख-दर्द से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि वह उसकी खिल्ली भी उड़ाता है। प्राचुर्य और धनाढ्यता का उसका यह अश्लील प्रदर्शन भी आँसुओं के समन्दर में खड़ी मेहनतकश जनता के धैर्य को परख रहा है।























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