क़र्ज़ माफ़ी के साथ पूँजीपति हुए मालामाल!
देश की ग़रीब जनता कुल टैक्सों का तीन-चौथाई से भी ज़्यादा परोक्ष करों के रूप में देती है। मगर इसका भारी हिस्सा नेताशाही और अफ़सरशाही की ऐय्याशियों पर और धन्नासेठों को तमाम तरह की छूटें और रियायतें देने पर ख़र्च हो जाता है। इतने से भी उनका पेट नहीं भरता तो वे बैंकों से भारी क़र्जे़ लेकर उसे डकार जाते हैं! ग़रीबों के क़र्जे़ वसूल करने के लिए उनकी झोपड़ी तक नीलाम करवा देने वाली सरकार अपने इन माई-बापों से एक पैसा नहीं वसूल पाती और फिर कई साल बाद उन्हें माफ़ कर दिया जाता है। दरअसल इस सारी रकम पर जनता का हक़ होता है। करोड़ों लोगों की छोटी-छोटी बचतों से बैंकों को जो भारी कमाई होती है, उसी में से वे पूँजीपति वर्ग के लिए यह दरियादिली दिखाते हैं!























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