मोदी सरकार की ई-20 नीति के ख़िलाफ़ लोगों का बढ़ता गुस्सा
ई-20 के कुप्रभावों को लेकर जितने लोगों ने सवाल उठाया है सबका ज़िक्र यहाँ कर पाना असम्भव है। कितनी बड़ी आबादी सरकार की ई-20 नीति से परेशान है, इसका अनुमान देश के तीन सौ से अधिक ज़िले में ‘लोकल सर्कल्स’ के द्वारा किये गये कुछ सर्वे से लगाया जा सकता है। इसी साल जून के हालिया सर्वे में 66 फ़ीसदी लोगों ने दस प्रतिशत या उससे अधिक माइलेज घटने की बात कही। इसी सर्वे के मुताबिक़ जून में ही 55 फ़ीसदी लोगों ने ई-20 से गाड़ियों में घिसावट, ख़राबी और सर्विसिंग और रिपेयरिंग पर ख़र्च का अतिरिक्त बोझ बढ़ने की बात कही है। सर्वे में लोग गाड़ियों के ईंधन पम्प, इंजेक्टर, रबर सील, ईंधन लाइन आदि में ख़राबी की बात कह रहे थे। यह सर्वे 2023 से पहले की गाड़ियों के ऊपर केन्द्रित था लेकिन इसके बाद की गाड़ियों पर भी ई-20 के ख़राब प्रभाव को लेकर लोगों ने सवाल उठाये हैं।























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