ईरान पर अमेरिकी और इज़रायली साम्राज्यवादी-ज़ायनवादी हमले के मायने
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध केवल ईरानी जनता की तकलीफ़ों को ही नहीं बढ़ा रहा है बल्कि समूचे पश्चिम एशिया की आम मेहनतकाश जनता की मुसीबतों को बढ़ा रहा है। पूँजीवाद-साम्राज्यवाद दुनिया को बर्बादी, अस्थिरता और अनिश्चितता के अलावा कुछ दे भी नहीं सकते हैं। चूँकि रूस और चीन प्रत्यक्ष रूप से इस युद्ध में शामिल नहीं हो रहे हैं इसलिए यह युद्ध किसी विश्व युद्ध की शक़्ल अख़्तियार करता नहीं नज़र आ रहा है। लेकिन इतना तो तय है कि इस क्षेत्रीय युद्ध के भीषण दुष्परिणाम होंगे। पश्चिम एशिया की इस अस्थिरता का असर भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में ऊर्जा संकट के रूप में पहले से ही दिखना शुरू हो गया है।























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