कोटद्वार (उत्तराखण्ड) में संघी उत्पात और फ़ासिस्ट साम्प्रदायिक राजनीति का कारगर प्रतिरोध
फ़ासिस्ट संघ परिवार की साम्प्रदायिक साज़िश की पोल-पट्टी खोलते ही ‘हिन्दू’ ‘हिन्दू’ नहीं रह जाता। वह “ग़द्दार” हो जाता है और हिन्दू धर्म के झण्डाबरदारों द्वारा उसकी हत्या की सुपारी बाँटी जाने लगती है। यानी या तो आप फ़ासिस्टों के हर झूठ, नफ़रत की राजनीति में उनका साथ दीजिए या चुप रहिए! अगर आप इनकी असलियत को उजागर करेंगे तो आपको ‘हिन्दू’ से ‘ग़द्दार’ होने में सेकण्ड भी नहीं लगेंगे! दीपक के साथ भी यही हुआ। दीपक ने बजरंग दल की गुण्डागर्दी पर ज्यों ही उँगली उठायी (जो कि हर इंसाफ़पसन्द इन्सान का फ़र्ज़ है!) वैसे ही दीपक के नाम सुपारी दी जाने लगी। ग़ौरतलब है कि ‘हिन्दू रक्षा दल’ के अध्यक्ष ललित शर्मा ने दीपक का सिर कलम कर लाने वाले को 5 लाख 51 हज़ार रुपये का इनाम देने का ऐलान किया।






















