पानीपत रिफ़ाइनरी के असंगठित मज़दूरों का संघर्ष : अमानवीय शोषण-उत्पीड़न के ख़िलाफ़ श्रमिकों के गुस्से का विस्फोट
हरियाणा के पानीपत में स्थित इस रिफ़ाइनरी की विभिन्न इकाइयों और विस्तार योजनाओं में 30 से 40 हज़ार मज़दूर-कर्मचारी काम करते हैं। इनमें से ज़्यादातर श्रमिक ठेकेदारों के तहत कार्यरत हैं। यहाँ बड़ी ठेकेदार कम्पनियों और छोटे ठेकेदारों का पूरा जाल मौजूद है जिनके ज़रिये मज़दूरों को काम पर रखा जाता है। ये ठेकेदार कम्पनियाँ और छोटे ठेकेदार मज़दूरों पर जोंक की तरह चिपके रहते हैं और उनके थोड़े-से वेतन से भी “अपना हिस्सा” उड़ाते रहते हैं। तमाम कम्पनियों में दमन और शोषण का सबसे ज़्यादा सामना ठेका श्रमिकों को ही करना पड़ता है। जानकारी के अनुसार पानीपत रिफाइनरी की कुल रिफ़ाइनिंग क्षमता लगभग 15 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) तक पहुँच चुकी है लेकिन हज़ारों ठेका मज़दूर, जो इस रिफ़ाइनरी के निर्माण, रखरखाव और उत्पादन कार्यों में लगे हैं, आज अपने बुनियादी अधिकारों तक से महरूम हैं। यहाँ कार्यरत मज़दूरों के आरोप हैं कि उनपर 12-12 घण्टे काम कराने का दबाव बनाया जाता है, ओवरटाइम का समुचित भुगतान नहीं होता, वेतन में देरी होती है, ईएसआई-पीएफ़ जैसे अधिकार नहीं मिलते और आवाज़ उठाने पर ठेकेदारों द्वारा काम से निकालने की धमकियाँ दी जाती हैं। यही नहीं काम करने के हालात बेहद अमानवीय हैं। श्रमिकों को पेयजल, शौचालय, परिवहन, कैण्टीन और पर्याप्त सुरक्षा उपकरण जैसी मूलभूत सुविधाएँ भी ठीक से नहीं मिलती हैं। रिफ़ाइनरी जैसे संवेदनशील और जोखिमपूर्ण कार्यस्थल पर इन अमानवीय हालात में श्रमिकों से काम लिया जाना सीधे तौर पर उनके जीवन के साथ खिलवाड़ है। ध्यान रहे श्रमिकों के ये हालात तो तब हैं जब मज़दूर-कर्मचारी विरोधी चार श्रम संहिताओं को अभी लागू होना है। ये श्रम संहिताएँ लागू होने के बाद श्रमिकों की स्थिति का अन्दाज़ा सहज ही लगाया जा सकता है।























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