Category Archives: गतिविधि रिपोर्ट

हैदराबाद के जीडीमेटला औद्योगिक क्षेत्र में गुड़गाँव, मानेसर और नोएडा के संघर्षरत मज़दूरों व मज़दूर कार्यकर्ताओं की गैर-कानूनी गिरफ़्तारियों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन।

कार्यकर्ताओं ने अपनी बात रखते हुए बताया कि यह पहली गिरफ़्तारी नहीं है। अब तक कई मजदूरों और मज़दूर कार्यकर्ता पुलिस के दमन और विच-हंट का शिकार हो चुके हैं। मज़दूर बढ़ती महँगाई और गैस की किल्लत के चलते लगातार वेतन बढ़ोतरी की माँग कर रहे थे। लेकिन फ़ैक्टरी प्रबंधन और सरकार की ओर से कोई सुनवाई नहीं होने के कारण मज़दूर अपनी माँगों को लेकर हड़ताल करने को मजबूर हुए। गुड़गाँव–मानेसर औद्योगिक पट्टी में मज़दूर 2 अप्रैल से अपनी माँगों को लेकर अलग-अलग कंपनियों में हड़ताल कर रहे हैं। वेतन बढ़ोतरी, 8 घंटे का कार्यदिवस, ओवरटाइम का दोगुनी दर से भुगतान और सस्ती दर पर कैंटीन की सुविधा—इन माँगों को लेकर मज़दूर हड़ताल पर हैं। यह हड़ताल कुछ दिन पहले नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में भी शुरू हुई।

मानेसर की कई फैक्टरियों में मज़दूरों स्वतः स्फूर्त हड़ताल जारी!

मानेसर की कई फैक्टरियों में मज़दूरों स्वतः स्फूर्त हड़ताल जारी! मानेसर में मुंजाल शोवा, रिचा, सत्यम जैसी कम्पनियों के बाद आज कई अन्य फैक्टरियों में हड़ताल शुरू हो गयी है।…

नोएडा औद्योगिक क्षेत्र में रिचा एक्सपोर्ट कम्‍पनी के मज़दूरों ने पूरे फैक्टरी क्षेत्र की गलियों में घूमते हुए रैली निकाली और सभी मज़दूरों से इस हड़ताल में शामिल होने का आह्वान किया।

नोएडा औद्योगिक क्षेत्र में रिचा एक्सपोर्ट कम्‍पनी के मज़दूरों ने पूरे फैक्टरी क्षेत्र की गलियों में घूमते हुए रैली निकाली और सभी मज़दूरों से इस हड़ताल में शामिल होने का…

गुड़गाँव-मानेसर के हड़ताल की लपटें पहुॅंची नोएडा तक! नोएडा के फेज़ 2 के रिचा ग्लोबल में अपनी जायज़ माँगों को लेकर हुई हड़ताल की शुरुआत!

गुड़गाँव-मानेसर के हड़ताल की लपटें पहुॅंची नोएडा तक! नोएडा के फेज़ 2 के रिचा ग्लोबल में अपनी जायज़ माँगों को लेकर हुई हड़ताल की शुरुआत! मानेसर में जारी हड़ताल की…

गुड़गांव- मानेसर में उठी वेतन बढ़ोतरी और मज़दूरों के जायज़ हक-अधिकारों की लड़ाई अब पूरे गुड़गांव, बिनौला, धारूहेड़ा और बावल सहित ऑटोमोबाइल और एक्सपोर्ट क्षेत्रों में फैल रही है। मज़दूरों की मांगें पूरी तरह जायज़ हैं—न्यायपूर्ण वेतन, बेहतर कार्य-परिस्थितियाँ और ठेका प्रथा का अंत। बिगुल मज़दूर दस्ता की अपील है कि गुरुग्राम, दिल्ली और पूरे एनसीआर के मज़दूर एक साझा मांग-पत्र तैयार करें और तालमेल कमेटी बनाकर इस संघर्ष को आगे बढ़ाएँ।

गुड़गांव- मानेसर में उठी वेतन बढ़ोतरी और मज़दूरों के जायज़ हक-अधिकारों की लड़ाई अब पूरे गुड़गांव, बिनौला, धारूहेड़ा और बावल सहित ऑटोमोबाइल और एक्सपोर्ट क्षेत्रों में फैल रही है। मज़दूरों…

ईरान पर अमेरिका-इज़रायल के कायराना साम्राज्यवादी-ज़ायनवादी हमले के ख़िलाफ़ और ईरानी जनता के समर्थन में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन!

ईरान पर अमेरिका-इज़रायल का यह हमला एक बार फिर साबित करता है कि जब तक साम्राज्यवादी- पूँजीवादी व्यवस्था क़ायम रहेगी, तब तक मानवता को विनाशकारी युद्धों और असीम पीड़ा का सामना करना पड़ेगा। पश्चिम एशिया, विशेषकर ईरान, अपने तेल और गैस संसाधनों के कारण अमेरिकी सैन्य आक्रामकता का शिकार बना हुआ है। इराक, सीरिया और यमन पहले ही इन युद्धों से तबाह हो चुके हैं, और अब ईरान को भी अस्थिरता की ओर धकेला जा रहा है। हालाँकि ईरान की जवाबी कार्यवाई को देखकर अब अमेरिका और इज़राइल को हर बीतते दिन के साथ यह बात स्पष्ट होती जा रही है कि ईरान इराक़ या वेनेज़ुएला नहीं है और यह साम्राज्यवादी युद्ध ख़ुद अमेरिकी साम्राज्यवाद के लिए काफी मंहगा साबित हो रहा है।

मोदी के इज़रायल दौरे और मोदी सरकार द्वारा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ जैसी साम्राज्यवादी साज़िश के समर्थन पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन!

भारत सरकार का पक्ष शुरू से ही फ़िलिस्तीनी आवाम के मुक्ति-संघर्ष के समर्थन में रहा है मगर भाजपा के सत्तासीन होने के बाद से फ़िलिस्तीन के प्रति इनके रुख में काफ़ी तेज़ी से बदलाव आया है। नरेन्द्र मोदी इज़रायल का दौरा करने वाले पहले प्रधानमंत्री बन चुके हैं। जहाँ वह एक तरफ़ अरब देशों के विदेश मंत्रियों को फ़िलिस्तीन के प्रति भारत के समर्थन का भरोसा दिलाते हैं, वहीं दूसरी ओर इज़रायल के साथ उनकी प्रगाढ़ होती मित्रता किसी से छुपी हुई नहीं है और अब तो वह इज़रायल के भ्रमण पर भी जा रहें है। यह पूरी तरह साफ़ है कि भाजपा की केन्द्र सरकार ने इज़रायल को अन्तरराष्ट्रीय समर्थन देकर उसके नरसंहार को परोक्ष रूप से जायज़ ठहराया है। यह फ़िलिस्तीन की जनता की पीठ में छुरा घोंपने के समान है। भले ही कागजों पर वे फ़िलिस्तीनी राज्य का समर्थन करने का ढोंग करते हों लेकिन ये ढोंग अन्तरराष्ट्रीय मंच पर अपनी छवि बचाने की एक खोखली और शर्मनाक कोशिश मात्र हैं। यह एक बार फिर मोदी सरकार के दोमुँहें और अवसरवादी चरित्र को बेनकाब करता है।

गैस-सिलेण्डर के बढ़ते संकट और मोदी सरकार की चुप्पी के ख़िलाफ़ देश भर में आक्रोश प्रदर्शन!

बड़े पैमाने पर सिलेण्डर की कालाबाज़ारी शुरू हो गयी है। अमीर तो पैसे के दम पर ब्लैक में सिलेण्डर हासिल कर ले रहे हैं, लेकिन ग़रीबों के घरों में चूल्हा जलने पर भी संकट आ गया है। प्रवासी मज़दूरों-मेहनतकशों की बड़ी आबादी के पास गैस कनेक्शन नहीं है, इसलिए वे छोटे सिलेण्डरों का इस्तेमाल करते हैं। अब उन्हें मजबूरन 300-400 रुपये किलो गैस ख़रीदना पड़ रहा है। कुछ मज़दूर बस्तियों से लोग पलायन करने को मजबूर हैं। 7 मार्च को सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेण्डर में 60 रुपये और कमर्शियल सिलेण्डर में 115 रुपये बढ़ा दिये।