Category Archives: गतिविधि रिपोर्ट

मनरेगा मज़दूरों की माँग: ‘पूरे साल काम दो, काम के पूरे दाम दो!’

वैसे तो मनरेगा क़ानून के अन्तर्गत 100 दिन के रोज़गार की बात ही अपने आप में इस देश के मज़दूरों और गरीबों के साथ एक भद्दा मज़ाक़ है क्योंकि ‘रोज़गार’ का मतलब ही है रोज़ किया जाने वाला काम। इसलिए असल माँग तो साल के 365 दिन पक्के रोज़गार की गारण्टी की होनी चाहिए। लेकिन अभी तो सरकार अपने द्वारा ही बनाये क़ानून के तहत 100 दिन का रोज़गार देने से भी भाग रही है। आँकड़ों के अनुसार पूरे देश में और कलायत में भी मनरेगा के तहत सालाना औसतन 25–30 दिन का ही काम मिल पाता है। गाँवों में बढ़ती महँगाई के बीच मज़दूरों द्वारा अपने परिवार का गुज़ारा करना कठिन हो गया है। ऐसे में मनरेगा ही देहाती क्षेत्र में मज़दूरों का एक सहारा है, लेकिन सरकारें लगातार इसके बजट और कार्यदिवसों में कटौती कर रही हैं।

फ़िलिस्तीनी जनता के मुक्ति संघर्ष के समर्थन में और ग़ज़ा में जारी इज़राइली जनसंहार के खिलाफ़ दुनियाभर के इंसाफ़पसन्द नागरिक और मज़दूर सड़कों पर

कई यूरोपीय देशों में डॉक मज़दूरों ने ग़ज़ा के साथ एकजुटता ज़ाहिर करते हुए इज़रायल से जुड़े शिपमेण्ट और सप्लाई चेन पर काम को ठप्प कर दिया। इसमें विशेष रूप से बेल्जियम, आयरलैण्ड, इटली, ग्रीस और स्पेन के डॉक मज़दूर संगठन शामिल रहे हैं। फ्रांस और पुर्तगाल की पोस्टल यूनियनें भी इस प्रदर्शन में शामिल रहीं। डॉक मज़दूर संगठनों ने इज़राइल को हथियार या सैन्य सामग्री पहुँचाने वाले पार्सल या शिपमेण्ट को सम्भालने से इन्कार कर दिया। ग्रीस में पीरियस पोर्ट पर डॉक मजदूरों ने ऐसे जहाज़ों को रोका, जिनमें हथियारों की खेप थी। इसी तरह इटली में यूएसबी यूनियन सिण्डिकेट डिबेस ने कई बार ऐलान किया कि वे हथियार लदे जहाज़ों को रोकेंगे. रोम और जिनेवा जैसे बंदरगाहों पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। फ्रांस में डॉक वर्कर्स ने एफ-35 जेट पार्सल को ले जाने वाले जहाज़ को समय से लेट कर दिया और मज़दूरों ने सरकार पर दबाव बनाया कि सरकार हथियारों का निर्यात बन्द करे।

तेलंगाना के पटानचेरु में केमिकल फ़ैक्ट्री हादसे पर जीडीमेटला औद्योगिक क्षेत्र में पर्चा वितरण

बिगुल मज़दूर दस्ता ने 29 जुलाई को हैदराबाद के जीडीमेटला औद्योगिक क्षेत्र में पटानचेरु की केमिकल फ़ैक्ट्री हादसे पर पर्चा वितरण किया। जीडीमेटला औद्योगिक क्षेत्र के शापूर निकास के पास, बिगुल मज़दूर दस्ता के कार्यकर्ताओं ने फ़ैक्ट्री से लौट रहे मज़दूरों के बीच अपनी बात करते हुए पर्चे बाँटे।

भारत में फ़िलिस्तीन के समर्थन में चलाया जा रहा है बीडीएस (BDS) अभियान!

भारत में भी बीडीएस अभियान को काफ़ी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। देश के कई राज्यों में फ़िलिस्तीन के साथ एकजुट भारतीय जन (IPSP) द्वारा यह अभियान चलाया जा रहा है। पटना, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आन्ध्रप्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, हरियाणा समेत कई अन्य जगहों पर इस अभियान के तहत गलियों-मुहल्लों में व्यापक पर्चा वितरण किया जा रहा है, घर-घर जाकर लोगों को फ़िलिस्तीन के संघर्ष से अवगत कराया जा रहा है। इज़रायली ज़ायनवादियों द्वारा की जा रही बर्बरता के पीछे के कारणों को बताते हुए लोगों से यह अपील की जा रही है कि वे ‘बीडीएस’ अभियान के साथ जुड़ें और इज़रायली सेटलर प्रोजेक्ट की मददगार कम्पनियों का हर रूप में पूर्ण बहिष्कार करें।

क्या फ़िलिस्तीनी जनता के मुक्ति संघर्ष का समर्थन करना और वहाँ जारी जनसंहार के ख़िलाफ़ बोलना हमारे देश में अपराध है?

आज़ादी के बाद से ही हमारे देश की सरकारें हमेशा से फ़िलिस्तीन के मुक्ति संघर्ष की समर्थक रही हैं। लेकिन आज फ़ासीवादी मोदी सरकार क़ागज़ पर तो फ़िलिस्तीन का समर्थन करती है लेकिन अलग-अलग मौक़े पर ज़ायनवादियों के साथ मोदी सरकार का नाजायज़ सम्बन्ध सबके सामने आ ही जाता है। हमारे देश की गोदी मीडिया, आईटी सेल, और सरकार फ़िलिस्तीन और इज़रायल के मुद्दे को मुसलमान बनाम यहूदी का मुद्दा बता रहे हैं, लेकिन जो लोग फ़िलिस्तीन का इतिहास जानते हैं उन्हें पता है कि 1948 से पहले इज़रायल नामक कोई देश नहीं था। इज़रायल कोई देश या राष्ट्र नहीं बल्कि फ़िलिस्तीन पर जबरन क़ब्ज़ा करने की एक सेटलर औपनिवेशिक परियोजना है। यह पश्चिमी साम्राज्यवाद द्वारा बनायी गयी एक औपनिवेशिक बस्ती है, जिसका इस्तेमाल वह फ़िलिस्तीनियों के दमन, विस्थापन व हत्या के लिए और साथ ही मध्य-पूर्व में पश्चिमी साम्राज्यवाद के हितों की सुरक्षा में इस्तेमाल की जाने वाली सैन्य चौकी के रूप में करता है। न तो फ़िलिस्तीन का मसला कभी धर्म का मसला था और न ही यह आज है। यह एक ग़ुलाम बनाये गये मुल्क की आज़ादी के लिए जारी लड़ाई है। ऐसे में आज दुनिया के हर इन्साफ़पसन्द इन्सान का कर्तव्य है कि वह फ़िलिस्तीन के साथ खड़ा हो।

बरगदवा, गोरखपुर के मज़दूरों ने मई दिवस को संकल्प दिवस के रूप में मनाया

पिछली 1 मई को (अन्तरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस) ‘बिगुल मज़दूर दस्ता’ और ‘टेक्सटाइल वर्कर्स यूनियन’ द्वारा गोरखपुर के बरगदवा में संकल्प दिवस के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मई दिवस के शहीदों की तस्वीर पर माल्यार्पण और ‘कारवाँ चलता रहेगा’ गीत से किया गया। ‘बिगुल मज़दूर दस्ता’ के प्रसेन ने मई दिवस के इतिहास पर और इस इतिहास से मजदूरों की अनभिज्ञता, शासक वर्ग द्वारा इस विरासत को धूल-मिट्टी डालकर दबाने की साज़िश पर विस्तार से बात रखी।

दिल्ली की आँगनवाड़ीकर्मियों ने मई दिवस की क्रान्तिकारी विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया!

1 मई यानी मज़दूर दिवस के मौक़े पर दिल्ली स्टेट आँगनवाड़ी वर्कर्स एण्ड हेल्पर्स यूनियन ने आम सभा का आयोजन किया। दिल्ली के सेण्ट्रल पार्क में आयोजित होने वाली इस सभा को रोकने की पुलिस व प्रशासन द्वारा काफ़ी कोशिशें की गयी। महिलाएँ पार्क में बैठकर बातचीत न कर पायें इसलिए पार्क के सभी प्रवेश द्वारों को बन्द कर दिया गया और आसपास भी बैठ रही महिलाकर्मियों को पुलिस द्वारा फ़र्ज़ी मुकदमे का डर दिखाकर डराया-धमकाया जाने लगा। इन सबके बावज़ूद महिलाओं ने अपनी सभा चलाने की ठानी और राजीव चौक के एक अन्य पार्क में बैठकर ‘मई दिवस के क्रान्तिकारी इतिहास और आज के वक़्त में इसकी ज़रूरत’ पर अपनी बातचीत को जारी रखा।

दिल्ली स्टेट आँगनवाड़ी वर्कर्स एण्ड हेलपर्स यूनियन ने वर्करों के प्रमोशन के मसले को लेकर सौंपा ज्ञापन

‘दिल्ली स्टेट आँगनवाड़ी वर्कर्स एण्ड हेल्पर्स यूनियन’ ने 9 मई को दिल्ली के महिला एवं बाल विकास विभाग को आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के पदोन्नति के मसले को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। दिल्ली के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 2 मई को जारी एक अधिसूचना के अनुसार सुपरवाइज़र के पद पर भर्ती के लिए आवेदन मँगवाए गये थे। भर्ती की इस प्रक्रिया में 50 फ़ीसदी पद आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के पदोन्नति के लिए तय किये गये हैं, लेकिन शैक्षणिक योग्यता पिछली भर्ती से बदल दी गयी है।

देशभर में जारी है ‘बीडीएस’ अभियान! इज़रायली हत्यारों से सम्बन्ध रखने वाली कम्पनियों व ब्राण्डों के उत्पादों का लोग कर रहे हैं बहिष्कार!

फ़िलिस्तीन के प्रति एकजुटता दर्शाने के लिए ‘बीडीएस’ नामक यह अभियान दुनिया भर में तेज़ी से फ़ैल रहा है। ‘बीडीएस’ अभियान का ही प्रभाव है कि कई देशों में इज़रायल की समर्थक कम्पनियों/ब्राण्डों की दुकानें बन्द हो चुकी हैं। कुछ देशों में तो फ़िलिस्तीन पर हमले की समर्थक कई कम्पनियाँ दिवालिया तक हो चुकी हैं। इज़रायली सेटेलमेण्ट की समर्थक स्टारबर्क्स नामक कॉफी कम्पनी की मलेशिया में कम से कम 50 दुकाने (आउटलेट) बन्द हो चुकी हैं।

कुसुमपुर पहाड़ी में अन्तरराष्ट्रीय स्त्री दिवस पर सांस्कृतिक संध्या : एक शाम संघर्षों के नाम

दिल्ली घरेलू कामगार यूनियन की ओर से 8 मार्च अन्तरराष्ट्रीय स्त्री दिवस के अवसर पर कुसुमपुर पहाड़ी के मद्रासी मन्दिर पार्क में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कामगार स्त्री दिवस के महत्व और आज के दौर में इसकी प्रासंगिकता को लेकर दिल्ली घरेलू कामगार यूनियन की ओर से 4 मार्च से कुसुमपुर पहाड़ी की गलियों में अभियान चलाया जा रहा था और मज़दूरों-मेहनतकशों को इस अवसर पर होने वाले सांस्कृतिक संध्या की सूचना दी जा रही थी। कुसुमपुर के स्त्री व पुरुष मज़दूरों को बताया गया कि कार्यक्रम में नाटक और गीतों के साथ दिल्ली घरेलू कामगार यूनियन की माँगों और कामों पर भी चर्चा होगी। अभियान के दौरान मज़दूरों ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सहयोग भी किया।