Category Archives: गतिविधि रिपोर्ट

शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफ़े की माँग को लेकर दिल्ली के जन्तर-मन्तर पर छात्रों-युवाओं का विरोध प्रदर्शन

सीबीएसई द्वारा एक कम्पनी को फ़ायदा पहुँचाने के लिए छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया गया। इन दिनों विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक, धाँधली और घपलेबाजी को लेकर छात्र-युवा आबादी के बीच गहरा आक्रोश व्याप्त है। लगातार बढ़ते आक्रोश के बीच 6 जून को दिल्ली में जन्तर-मन्तर पर सीजेपी ने अपना पहला प्रदर्शन किया था। इसके बाद सीजेपी के द्वारा लखनऊ और पुणे में भी प्रदर्शन किया गया था। जन्तर-मन्तर पर अभी जारी प्रदर्शन दिल्ली में सीजेपी का दूसरा प्रदर्शन है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने छात्र-युवा आबादी को अपनी पीड़ा व्यक्त करने का और संघर्ष का एक चैनल मुहैया कराया जो निश्चित तौर पर एक प्रशंसनीय काम है। सीजेपी से पहले हुए के प्रदर्शनों में भी धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफ़े की माँग को उठाया जाता रहा है।

‘नोएडा के मज़दूरों और कार्यकर्ताओं की रिहाई के लिए अभियान’ (CaRWAN) के बैनर तले दिल्ली में विरोध प्रदर्शन

प्रोफेसर नंदिता नारायण ने कहा, “मुझे आकृति, हिमांशु और योगेश जैसे छात्रों पर गर्व है। आज की पीढ़ी के छात्रों को ऐसा ही करना चाहिए। केवल अपने करियर के बारे में सोचने के बजाय उन्होंने अपनी शिक्षा का उपयोग उत्पीड़ित लोगों की आवाज़ बनने के लिए किया। सभा में उपस्थित छात्रों को सम्बोधित करते हुए प्रो. नंदिता ने विश्वविद्यालयों में जनवादी स्पेस के सिकुड़ने पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “यह वास्तव में परेशान करने वाली बात है कि योगेश को यूपी पुलिस के सिविल ड्रेस में आए पुलिसकर्मियों द्वारा नॉर्थ कैंपस के अन्दर से अगवा किया गया और विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।” सामाजिक कार्यकर्ता नौरीन ने नोएडा मज़दूर आन्दोलन के बाद यूपी पुलिस द्वारा चलाए गए “विच हंट” पर विस्तार से बाते रखी। यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने निजी स्थानों, लाइब्रेरी और कई जगहों पर ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से छापेमारी की और बिना किसी उचित प्रक्रिया के युवाओं को अगवा कर अवैध रूप से गिरफ़्तार किया। नौरीन ने यह भी बताया कि ट्रैकिंग और निगरानी अभी भी जारी है। यूपी पुलिस के अधिकारी अब भी दिल्ली में महिला छात्रों का पीछा कर रहे हैं, उन्हें धमका रहे हैं। उन्होंने कहा, “ पुलिस ने मुझे भी अगवा किया था, मेरी धार्मिक पहचान के कारण प्रताड़ित किया, मुझे बांग्लादेशी तक कहा।”

बढ़ती महँगाई और ईंधन की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी के ख़िलाफ़ दिल्ली में विरोध प्रदर्शन

आज मेहनतकश आम लोगों, छात्रों और युवाओं को अडानी, मोदी और हरदीप पुरी के पापों और स्वार्थों का बोझ उठाना पड़ रहा है। वर्तमान प्रधानमन्त्री महँगाई को लेकर चिन्तित नहीं हैं, जो आम लोगों की ज़िन्दगी को असहनीय बना रही है, बल्कि वे पूँजीपति वर्ग के मुनाफ़े को लेकर चिन्तित हैं। इस महँगाई का सबसे बड़ा बोझ मज़दूरों पर पड़ रहा है।

1 मई अन्तरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस की क्रान्तिकारी विरासत ज़िन्दाबाद! रोहतक शहर के विभिन्न लेबर चौकों पर कार्यक्रम

मई दिवस का इतिहास हमारे लिए ख़ास मायने रखता है। इस दुनिया में एक तरफ़ कमेरों का वर्ग है जिसकी मेहनत के दम पर दुनिया की सारी चमक-दमक क़ायम है। लेकिन मेहनतकशों की ज़िन्दगी तबाह-बर्बाद है। बारह-बारह घण्टे काम करके भी गुजारा नहीं, बच्चों के लिए अच्छे दवा-इलाज़, शिक्षा-रोज़गार तक का प्रबन्ध नहीं हो पाता। दूसरी तरफ़ लुटेरों का वर्ग है जो बिना कुछ किये भी केवल शोषण और लूट के दम पर दुनिया की दौलत पर कब्ज़ा करके बैठा है। सबकुछ पैदा तो कमेरा वर्ग करता है लेकिन फ़िर भी जीवन की बुनियादी ज़रूरतों तक से महरूम रहकर शोषण की चक्की में पिसता रहता है।

मई दिवस के अवसर पर RWPI द्वारा शाहबाद डेरी, दिल्ली में गली मीटिंग का आयोजन

मई दिवस के हमारे शहीदों ने अपना ख़ून बहाकर ‘आठ घण्टे काम, आठ घण्टे मनोरंजन, आठ घण्टे आराम’ का अधिकार हासिल किया था। लेकिन आज मज़दूर वर्ग के इस अधिकार को फ़ासीवादी मोदी सरकार चार लेबर कोड के ज़रिये ख़त्म कर रही है। जिस तरह से शिकागो के हे मार्केट स्क्वायर में मज़दूरों की सभा में पुलिस और मालिकों के गुण्डों ने ही बम फेंककर सारा इल्ज़ाम मज़दूरों और मज़दूर नेताओं पर डाल दिया था, ठीक उसी पद्धति पर अमल उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और उसकी पुलिस ने मज़दूर आन्दोलन व उसके एक्टिविस्टों के साथ किया है। नोएडा में तीन दिन से मज़दूर शान्तिपूर्वक हड़ताल कर रहे थे। मालिक और सरकार तरह-तरह से इस हड़ताल को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन हर बार उनके हाथ नाकामयाबी ही लग रही थी। अब तमाम अख़बारी रपटों व सबूतों के सामने आने से साफ़ प्रतीत हो रहा है कि मज़दूरों की शान्तिपूर्वक हड़ताल से बौखलाकर मालिकों और सरकार ने आन्दोलन का दमन किया।

मज़दूर दिवस का संकल्प: लड़कर लेंगे सारे हक़! हरियाणा के कलायत ब्लॉक में साझा कार्यक्रम

1 मई, मज़दूर दिवस के संकल्प को लेकर हरियाणा के कलायत ब्लॉक में मज़दूर-कर्मचारी संगठनों द्वारा साझा कार्यक्रम आयोजित किया गया। मज़दूर दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में मज़दूर आन्दोलन की चुनौतियों और प्रतिरोध पर एक हॉल मीटिंग की गयी। कार्यक्रम में सर्व कर्मचारी संघ, क्रान्तिकारी मनरेगा मज़दूर यूनियन, आँगनवाड़ी, आशा और मिड-डे मील यूनियनों ने भागीदारी की।

मज़दूर दिवस एवं 1857 के विद्रोह को याद करते हुए पटना में आयोजित किये गये कई कार्यक्रम

मई दिवस के अवसर पर पटना में भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (आरडब्ल्यूपीआई) द्वारा पटना के दो निम्न मध्यमवर्गीय व मेहनतकश रिहायशी इलाकों में कार्यक्रम आयोजित किये गये। 2 मई को पटना के कौशल नगर इलाके में सांस्कृतिक संध्या एवं जन सभा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सांस्कृतिक टीम द्वारा ‘हम मेहनतकश जग वालों से जब अपना हिस्सा माँगेंगे’ एवं ‘इन हाथों को काम नहीं’ जैसे गीतों की प्रस्तुति की गयी।

बवाना औद्योगिक क्षेत्र मज़दूर यूनियन द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में ज़ारी मज़दूर आन्दोलन के समर्थन में व राजकीय दमन के विरोध में किये गये कार्यक्रमों की संक्षिप्त रिपोर्ट

मई दिवस के शहीदों की अगुवाई में मज़दूरों ने अपने वक़्त में कारख़ानों का चक्का जाम कर दिया था। शहादत, दमन-उत्पीड़न के बाद भी मज़दूर डटे रहे और पूरे मज़दूर वर्ग की तरफ़ से उन्होंने अन्ततः पूँजीपतियों की सरकारों से 8 घण्टे काम का हक़ लड़कर छीन लिया था। लेकिन वर्तमान समय में पूँजी की अपनी गति के चलते पूँजीवादी दुनिया लम्बे आर्थिक संकट से गुज़र रही है। इस स्थिति से निपटने के लिए 1990 के दशक से ही मज़दूरों के हक़ों-अधिकारों पर लगातार हमले “श्रम क़ानूनों में सुधार” के नाम पर किये जा रहे थे। लेकिन पूँजीपति वर्ग इससे संतुष्ट न था। नतीजतन, मेहनतकश जनता की मेहनत को सस्ते दामों पर चूसने और जन-असन्तोष को कुचलने के लिए पूँजीपति वर्ग ने फ़ासीवादी भाजपा को सत्ता सौंप दी ताकि नवउदारवाद की मज़दूर-विरोधी नीतियों के विरुद्ध उठने वाली विरोध की हर आवाज़ को बेरहमी से कुचला जा सके और मज़दूर-मेहनतकश आबादी को धर्म के नाम पर बाँटकर उसकी शक्ति को तोड़ा जा सके। उसके बाद से मोदी सरकार ने अरबों रुपये के चन्दे के बदले पूँजीपतियों के पक्ष में मज़दूरों को ग़ुलामों की तरह खटाने के लिए क़ानूनी इन्तज़ामात करने और साम्प्रयिकता की आग में उन्हें झोंकने में पूरा ज़ोर लगा दिया है।

देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम 1857 की बग़ावत के अवसर पर शाहबाद डेरी में आयोजित किये गये कार्यक्रम

देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम 1857 की बग़ावत की 169वीं वर्षगाँठ (10 मई) के अवसर पर हिन्दू-मुस्लिम एकता अभियान के तहत भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (RWPI) द्वारा शाहबाद डेरी (दिल्ली) इलाक़े में अभियान चलाया गया। इस दौरान घर-घर जाकर, गली मीटिंग और पर्चा वितरण के ज़रिये 1857 कि विरासत से लोगों को अवगत कराया गया। इसी कड़ी में 10 मई को शाहबाद डेरी के महाराणा प्रताप चौक पर जनसभा का आयोजन किया गया। जनसभा की शुरुआत क्रान्तिकारी नारों के साथ की गयी। इसके बाद साथी नौरीन ने सभा का संचालन करते हुए कार्यक्रम की रुपरेखा और आज के वक़्त में 1857 की क्या प्रासंगिकता है और हमें इससे क्या सीखना चाहिए, पर बात रखी।

हैदराबाद के जीडीमेटला औद्योगिक क्षेत्र में गुड़गाँव, मानेसर और नोएडा के संघर्षरत मज़दूरों व मज़दूर कार्यकर्ताओं की गैर-कानूनी गिरफ़्तारियों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन।

कार्यकर्ताओं ने अपनी बात रखते हुए बताया कि यह पहली गिरफ़्तारी नहीं है। अब तक कई मजदूरों और मज़दूर कार्यकर्ता पुलिस के दमन और विच-हंट का शिकार हो चुके हैं। मज़दूर बढ़ती महँगाई और गैस की किल्लत के चलते लगातार वेतन बढ़ोतरी की माँग कर रहे थे। लेकिन फ़ैक्टरी प्रबंधन और सरकार की ओर से कोई सुनवाई नहीं होने के कारण मज़दूर अपनी माँगों को लेकर हड़ताल करने को मजबूर हुए। गुड़गाँव–मानेसर औद्योगिक पट्टी में मज़दूर 2 अप्रैल से अपनी माँगों को लेकर अलग-अलग कंपनियों में हड़ताल कर रहे हैं। वेतन बढ़ोतरी, 8 घंटे का कार्यदिवस, ओवरटाइम का दोगुनी दर से भुगतान और सस्ती दर पर कैंटीन की सुविधा—इन माँगों को लेकर मज़दूर हड़ताल पर हैं। यह हड़ताल कुछ दिन पहले नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में भी शुरू हुई।