Category Archives: समाज

योगी-राज में उत्तर प्रदेश में जातिवादी गुण्डों का कहर

आज देश में होने वाली जातिगत उत्पीड़न की घटनाओं में उत्तर-प्रदेश पहले नम्बर पर आता है। इस बात से समझा जा सकता है कि जातिवादी गुण्डों और अपराधियों के मन में कानून का डर बैठा है या संरक्षण पाने का विश्वास! ‘राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो’ के 2022 के आँकड़ों के अनुसार यूपी में दलितों के ख़िलाफ़ अपराध के 15,368 मामले दर्ज हुए जो देश में कुल दलित-विरोधी अपराधों का 26.7% है। वहीं इन घटनाओं में 2021 की तुलना में 16% की वृद्धि हुई है। शायद जातिगत उत्पीड़न में उत्तर प्रदेश के प्रथम स्थान और वृद्धि को ही देखकर नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि ‘योगी का कानून व्यवस्था मॉडल देश के लिए उदाहरण है।’ इसी मॉडल को राजस्थान और मध्य-प्रदेश की भाजपा सरकारों ने अपना लिया है, तभी तो ये राज्य दलितों के ख़िलाफ़ अपराध के मामले में दूसरे और तीसरे नम्बर पर हैं।

पंजाब में प्रवासियों के ख़िलाफ़ भड़कायी जा रही नफ़रत से किसको होगा फ़ायदा ?

तर्क-विवेक और न्यायबोध को एक ओर रखकर एक प्रवासी मज़दूर के दोष का ठीकरा सभी प्रवासियों पर फोड़ा जाने लगा। देखते-देखते पंजाब में रहने वाले लाखों प्रवासी श्रमिकों में भय की लहर दौड़ गयी और उन्हें डर के साये में धकेल दिया गया। यह पूरा मामला दर्शाता है कि लोगों की निम्न राजनीतिक चेतना का फ़ायदा उठाकर उनका ध्यान उनके असली मुद्दों से भटकाना कितना आसान है।

दिल्ली के शाहाबाद डेरी इलाक़े में छठ घाट पर डूबने से युवक की मौत

यह घाट बारिश के मौसम में नाले और बरसात के पानी से भर जाता है। बार-बार प्रशासन को बोलने के बावजूद इसपर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। पाँच मन्दिर, शाहबाद डेरी में झुग्गियों के पीछे खुला मैदान स्थित है। यहाँ लोग पूरे दिन फैक्टरियों, कारखानों, और कोठियों में खटकर आने के बाद इस गर्मी और उमस के मौसम में बाहर टहलते हैं। कोई खुली जगह न होने के कारण बच्चे इसी पाँच मन्दिर के मैदान में खेलते-कूदते हैं। कुछ घटनाएँ ऐसी भी सामने आई जहाँ बच्चे तालाब में डूबते-डूबते बचे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए इस तालाब को नियमित तौर पर खाली करवाये जाने की माँग भी ज्ञापन में रखी गयी ताकि तालाब में डूबने से लेकर बीमारियों के पनपने के ख़तरे को टाला जा सके। इसके साथ ही यह माँग भी उठायी गयी कि तालाब के इर्द-गिर्द सुरक्षा हेतु चारदीवारी बनायी जाये और ख़राब पड़ी लाइट को जल्द से जल्द ठीक कराया जाये।

काँवड़ यात्रा के ज़रिये फैलाया गया साम्प्रदायिक उन्माद!

यात्रा के दौरान तेज आवाज़ में डीजे बजाना, मारपीट करना, किसी भी शक़ मात्र से किसी की जान ले लेना, छेड़खानी करना, ड्रग्स लेकर आम राहगीरों को उत्पीड़ित करना… क्या यह सहने योग्य है? इसका भला धर्म-कर्म से क्या लेना-देना? यह तो एक दिशाहीन लम्पट आबादी को साम्प्रदायिक उन्माद से भरकर अपनी राजनीति के लिए फ़ासीवादी संघ व भाजपा द्वारा इस्तेमाल किया जाना है। यात्रा के दौरान तमाम ऐसी घटनाएँ सामने आयी, जिससे यह पता चलता है कि काँवड़ यात्रा लम्पटों की एक ऐसी भीड़ बन गयी है, जिसमें कोई भी गैरक़ानूनी काम करने का लाइसेंस मिल जाता है।

भाजपा के रामराज्य में बढ़ते दलित-विरोधी अपराध

2014 में फ़ासीवादी भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद जातिगत उत्पीड़न की घटनाओं की बाढ़ सी आ गयी है। दलित विरोधी अपराध बर्बरता की सारी हदें पार करते जा रहे हैं। ऐसा कोई दिन नहीं जाता, जब दलितों के साथ जातिवादी गुण्डों द्वारा हिंसा की घटना सामने न आती हो। देश भर में दलितों के ख़िलाफ़ होने वाले उत्पीड़न और शोषण की घटनाएँ इतिहास में एक ख़ून सने पन्ने की तरह दर्ज़ हो गयी हैं।

लाभार्थियों के फ़ेशियल रिकॉग्निशन व ई-केवाईसी के ज़रिये जनता की निगरानी और आँगनवाड़ीकर्मियों पर काम का बोझ बढ़ाती मोदी सरकार!

समेकित बाल विकास परियोजना का घोषित मक़सद ज़रूरतमन्द लोगों तक आवश्यक सुविधाएँ और पोषाहार पहुँचाने का है। इसे डिजिटल करना न केवल आँगनवाड़ीकर्मियों का काम बढ़ाना होगा बल्कि उस ज़रूरतमन्द आबादी तक इस परियोजना की पहुँच को ही सीमित कर देना होगा। दिल्ली स्टेट आँगनवाड़ी वर्कर्स एण्ड हेल्पर्स यूनियन सरकार के इस क़दम का विरोध करती है।

विश्व की “चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था” के शोर के पीछे की सच्चाई

जीडीपी का बढ़ना किसी भी देश की आर्थिक स्थिति के ठीक होने का सूचक नहीं है। क्योंकि इससे इस बात का पता नहीं चलता कि देश में पैदा होने वाली कुल सम्पदा का कितना हिस्सा देश के बड़े धनपशु हड़प लेते हैं और देश की आम मेहनतकश जनता की स्थिति क्या है? पिछले दिनों विश्व असमानता लैब की नवीनतम रिपोर्ट ‘भारत में आय और सम्पत्ति असमानता, 1922-2023: अरबपति राज का उदय’ (मार्च 2024) ने बताया कि भारत की शीर्ष 1% आबादी का राष्ट्रीय आय के 22.6% हिस्से पर नियन्त्रण है। शीर्ष 10% आबादी के पास राष्ट्रीय आय का 57.7% हिस्सा है, जबकि निचले 50% के पास केवल 15% हिस्सा है। यह असमानता दुनिया में सबसे अधिक है। साफ़ है कि दुनिया की “चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था” में पूँजीपतियों-धन्नासेठों की तिजोरियों का आकार तो बढ़ता जा रहा है लेकिन आम मेहनतकश आबादी इस “चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था” में तबाही और बरबादी की और गहरी खाई में धकेली जा रही है। यह हास्यास्पद है कि जिस जापान को पीछे छोड़कर चौथी अर्थव्यवस्था होने का दावा किया जा रहा है, वहाँ प्रति व्यक्ति जीडीपी भारत की तुलना में लगभग 11.8 गुना अधिक है।

भाजपा के “रामराज्य” में बढ़ते स्त्री-विरोधी अपराध

फ़ासीवादी भाजपा के शासन में एक तरफ़ महिलाओं को ही सीमा में और संस्कार में रहने की हिदायत दी जाती है, महिलाओं के कपड़े पहनने, खाने, जीवनसाथी चुनने की आज़ादी पर हमला किया जाता है और दूसरी तरफ़ बलात्कारियों को खुली छूट मिलती है! जब ऐसी पार्टी सत्ता में होगी तो क्या नवधनाढ्य वर्गों, लम्पट टुटपुँजिया वर्गों और नेताओं की बिगड़ी औलादों का दुस्साहस नहीं बढ़ेगा कि वह किसी भी औरत पर हमला करे और उसका बलात्कार करे? जब इन आपराधिक तत्वों को यह यक़ीन है कि इन अपराधों की उसे कोई सज़ा नहीं मिलेगी, बस उसे भाजपा में शामिल हो जाने की आवश्यकता है, तो ज़ाहिर सी बात है कि स्त्री–विरोधी अपराधों में बढ़ोत्तरी तो होगी ही। शुचिता और संस्कार का ढोंग करने वाली फ़ासीवादी भाजपा के राज ने इस पतनशील और प्रतिक्रियावादी स्त्री-विरोधी मानसिकता को और मज़बूत किया है। भाजपा के गुरू गोलवलकर का मानना था कि औरतें बच्चा पैदा करने का यन्त्र होती हैं; इनके माफ़ीवीर सावरकर का मानना था कि बलात्कार का राजनीतिक हिंसा के उपकरण के तौर पर इस्तेमाल किया जाना चाहिए। यही इनकी असली जन्मकुण्डली है!

रसोई गैस के दाम और पेट्रोल-डीज़ल पर कर बढ़ाकर मोदी सरकार का जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका!

सरकार लगातार कॉरपोरेट कर और उच्च मध्य वर्ग पर लगने वाले आयकर को घटा रही है और इसकी भरपाई आम जनता की जेबों से कर रही है। भारत में मुख्‍यत: आम मेहनतकश जनता द्वारा दिया जाने वाला अप्रत्‍यक्ष कर, जिसमें जीएसटी, वैट, सरकारी एक्‍साइज़ शुल्‍क, आदि शामिल हैं, सरकारी खज़ाने का क़रीब 60 प्रतिशत बैठता है। यह वह टैक्‍स है जो सभी वस्तुओं और सेवाओं ख़रीदने पर आप देते हैं, जिनके ऊपर ही लिखा रहता है ‘सभी करों समेत’। इसके अलावा, सरकार बड़े मालिकों, धन्‍नासेठों, कम्‍पनियों आदि से प्रत्‍यक्ष कर लेती है, जो कि 1990 के दशक तक आमदनी का 50 प्रतिशत तक हुआ करता था, और जिसे अब घटाकर 30 प्रतिशत तक कर दिया गया है। यह कॉरपोरेट और धन्‍नासेठों पर लगातार प्रत्‍यक्ष करों को घटाया जाना है, जिसके कारण सरकार को घाटा हो रहा है। दूसरी वजह है इन बड़ी-बड़ी कम्‍पनियों को टैक्‍स से छूट, फ़्री बिजली, फ़्री पानी, कौड़ियों के दाम ज़मीन दिया जाना, घाटा होने पर सरकारी ख़र्चों से इन्‍हें बचाया जाना और सरकारी बैंकों में जनता के जमा धन से इन्‍हें बेहद कम ब्याज दरों पर ऋण दिया जाना, उन ऋणों को भी माफ़ कर दिया जाना या बट्टेखाते में, यानी एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) बोलकर इन धन्‍नासेठों को फोकट में सौंप दिया जाना। अब अमीरों को दी जाने वाली इन फोकट सौगातों से सरकारी ख़ज़ाने को जो नुक़सान होता है, उसकी भरपाई आपके और हमारे ऊपर टैक्‍सों का बोझ लादकर मोदी सरकार कर रही है।

प्रधानमन्त्री के संसदीय क्षेत्र में बर्बर बलात्कार और न्यायपालिका का दिनोदिन बढ़ता दकियानूसी और स्त्री-विरोधी चरित्र

यह केवल न्यायपालिका का मामला नहीं है। बल्कि आज देश की सभी सर्वोच्च संस्थाओं में फ़ासीवादी घुसपैठ हो चुकी है। फ़ासीवाद अपनी मूल प्रकृति से ही स्त्री विरोधी विचारधारा को खाद पानी देने का काम करता है। जैसा कि वित्तमन्त्री निर्मला सीतारमण और योगी आदित्यनाथ के बयानों से समझा जा सकता है। जहाँ निर्मला सीतारमण का कहना है कि “पितृसत्ता वामपन्थी अवधारणा है।” वहीं योगी का मानना है कि “महिलाओं को स्वतन्त्र या आज़ाद नहीं छोड़ा जा सकता है।” बस योगी जी यह कहना भूल गए कि कुलदीप सिंह सेंगर, आशाराम, रामरहीम जैसे अपराधियों को आज़ाद छोड़ने से देश “विश्वगुरु” बनेगा। फ़ासीवादी शासन में बलात्कारियों के पक्ष में फ़ासिस्टों द्वारा तिरंगा यात्रा निकलने से लेकर आरोपियों को बेल मिलने पर फूल माला से स्वागत करना आम बात बन चुकी है। ऐसे में समाज के सबसे बर्बर, अपराधिक और बीमार तत्वों को अपराध करने की खुली छुट मिल जाती है। यह स्थिति और भी ख़तरनाक तब बन जाती है बुर्जुआ न्याय व्यवस्था बुर्जुआ जनवाद के अतिसीमित प्रगतिशीलता को स्थापित करने की जगह फ़ासिस्टों के हाथ की कठपुतली बन जाय और जनविरोधी-स्त्रीविरोधी बयानों की झड़ी लगा दे। न्यायपालिका के इस प्रकार के बयानों की वजह से समाज में गहराई से पैठी स्त्री विरोधी मानसिकता को फलने-फूलने के लिए खाद पानी मिलेगा। और कालान्तर में स्त्रियों के ख़िलाफ़ होने वाले जघन्य अपराधों के लिए ज़मीन तैयार हो रही है।।