क्रान्तिकारी मज़दूर शिक्षणमाला – 30 : मार्क्सवादी राजनीतिक अर्थशास्त्र के सिद्धान्त : खण्ड-2 अध्याय – 4 औद्योगिक पूँजी के परिपथ की सम्पूर्ण गति
मार्क्स बताते हैं कि पूँजी को केवल गति में ही समझा जा सकता है। इस गति में जो चीज़ निहित होती है वह है कई पूँजियों का आपस में अन्तर्गुन्थन, उनकी प्रतिस्पर्द्धा, अराजकता और अनिश्चितता। जब हम एक वैयक्तिक पूँजी की गति को उसके तीनों परिपथों की गति में सम्पूर्णता में देखते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है कि पूँजी का निवेश, उसका मूल्य-संवर्धन और मुद्रा-रूप में उसका वास्तवीकरण पूँजीपति के मनोगत निर्णयों पर निर्भर है। लेकिन जब समूची सामाजिक पूँजी की गति का अध्ययन किया जाता है, तो यह बात ज़ाहिर हो जाती है कि संचरण के क्षेत्र में पूँजी-मूल्य वैयक्तिक पूँजीपतियों की इच्छा से स्वायत्त और स्वतन्त्र हो जाता है। मूल्य का यह स्वायत्तीकरण वास्तव में और कुछ नहीं बल्कि आम तौर पर औद्योगिक पूँजी की गति में अन्तर्निहित गुण है।






















