प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की विरासत को याद करो! हिन्दू-मुसलमान एकता को बुलन्द कर ‘नये कम्पनी राज’ के खि़लाफ़ आवाज़ उठाओ!!
इस ‘नये कम्पनी राज’ को बेरोक-टोक चलाने के लिए भाजपा-आरएसएस ने अंग्रेज़ों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति को नये स्तर पर लागू किया है। देश की जनता बेरोज़गारी, महँगाई, स्कूल-कॉलेज, अस्पताल और आवास जैसे असल मुद्दों के लिए न संघर्ष कर पाये, इसलिए ही फ़ासीवादी हुक्मरानों ने लोगों के बीच ही साम्प्रदायिक नफ़रत के बीज बो दिये हैं। फ़ासीवादी प्रचार तंत्र के व्यापक ताने-बाने और अपने काडर-आधारित ढाँचे के दम पर और गोदी मीडिया का इस्तेमाल कर भाजपा और संघ ने देश की मुस्लिम आबादी को हिन्दू आबादी के काल्पनिक शत्रु के तौर पर खड़ा किया है। ‘लव जिहाद’, ‘लैण्ड जिहाद’, ‘थूक जिहाद’ से लेकर गोरक्षा के ढोंग और मस्जिदों के नीचे मन्दिरों के अवशेष ढूँढकर, घुसपैठियों का नक़ली भय दिखाकर फ़ासीवादी शक्तियों ने जनता की जुझारू एकजुटता को असल मुद्दों पर क़ायम होने से रोका है। जब इस एक ‘नये कम्पनी राज’ में इस मायने में अंग्रेज़ों के वारिस यानी भाजपा-आरएसएस के लोग ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति को अपना रहे हैं तो हमें भी 1857 के अपने पुरखों से सीखना होगा। आज के नये ‘कम्पनी राज’ और ‘फूट डालो राज करो’ की नीति के नये पैरोकार यानी साम्प्रदायिक फ़ासीवादियों से संघर्ष करने के लिए हमें 1857 के शहीदों की स्मृति से संकल्प लेते हुए संघर्ष करना होगा।























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