ईरान पर अमेरिका-इज़रायल द्वारा थोपा गया साम्राज्यवादी युद्ध अमेरिकी साम्राज्यवाद और इज़रायली सेटलर उपनिवेशवाद की शर्मनाक हार के साथ ख़त्म होगा
ईरान युद्ध विश्व की राजनीति में एक नयी करवट की ओर ले जा रहा है। इस युद्ध के बाद साम्राज्यवाद के वैश्विक समीकरणों में निश्चित ही परिवर्तन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इससे सर्वाधिक फ़ायदा रूस-चीन साम्राज्यवादी धुरी को मिलेगा और सबसे ज़्यादा नुक़सान अमेरिका-ब्रिटेन धुरी व यूरोपीय संघ धुरी को होगा। पश्चिमी साम्राज्यवाद की दोनों ही धुरियों के बीच की और उनकी आन्तरिक एकता भी भयंकर दबाव में है। नतीजतन, आने वाले समय में साम्राज्यवाद का राजनीतिक संकट और गहरायेगा और कालान्तर में इससे भी बड़े युद्धों को जन्म देगा। ये युद्ध पूरी दुनिया में ही जनता के लिए भयंकर स्थितियाँ पैदा करेंगे लेकिन विशेष तौर पर सापेक्षिक रूप से पिछड़े पूँजीवादी देशों में जनअसन्तोष बेहद तेज़ी से बढ़ेगा। क्रान्तिकारी शक्तियों को इस आने वाले समय की तैयारी तत्काल करनी होगी। मज़दूर वर्ग के हिरावल को आने वाले उथल-पुथल के लिए अपने आपको तैयार करना होगा।






















