कविता : लुटेरा और उसका नौकर / बेर्टोल्ट ब्रेष्ट Poem : The Robber and His Servant / Bertolt Brecht
खड़े थे वहाँ कई, आड़े तिरछे, किसान
था लेकिन सभी का
उन्हीं लुटेरों पर ध्यान।
देखा कि सच ही लुटेरों जैसा चेहरा था उस थुलथुल का
मगर उस सुखट्टे ने
क्यों साथ दिया उसका?






















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