महान साहित्यकार मक्सिम गोर्की के स्मृति दिवस (18 जून) के अवसर पर
“मैं मानव-जाति से प्रेम करता हूँ और चाहता हूँ कि उसे किसी भी तरह से दुःख न पहुँचाऊँ, परन्तु इसके लिये न तो हमें भावुकता का दामन पकड़ना चाहिए और न ही चमकीले शब्द- जाल और खूबसूरत झूठ की टट्टी खड़ी करके जीवन के भयानक सत्य को हमें छिपाना चाहिए ! ज़रूरी है कि हम जीवन की ओर मुँह करें और हमारे हृदय तथा मस्तिष्क में जो कुछ भी शुभ और मानवीय है, उसे जीवन में उड़ेल दें।”























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