तृणमूल काँग्रेस (टीएमसी) में मची भगदड़ के मायने
फ़ासीवादी किसी भी प्रकार की भलमनसाहत या “नैतिकता” की मध्यवर्गीय याचनाओं और अपीलों से कभी प्रभावित नहीं होते। आर.एस.एस. के गुरू गोलवलकर ने अपनी पुस्तक ‘वी अवर नेशनहुड डिफ़ाइण्ड’ में जर्मन नात्सियों व हिटलर की प्रशंसा की थी। भारतीय फ़ासीवादियों के विचारधारात्मक पितामह हिटलर ने भी जर्मनी में विपक्षी पार्टियों को जैसे-तैसे करके ठिकाने लगाया था। एक योग्य वंशज की भाँति भारतीय फ़ासीवादी भी अपने पुरखों के नक़्शे-क़दम पर चल रहे हैं। बल्कि कुछ मामलों में वे योजनाबद्धता, अपने इतिहास से सीखने, रणकौशल बनाने, धैर्य से लम्बी रणनीति पर सुचिन्तित अमल करने के मामले में हिटलर और मुसोलिनी से आगे जा चुके हैं।























Recent Comments