मई दिवस 2025 – रस्म-अदायगी से आगे बढ़कर मज़दूर वर्ग के अधिकारों पर असली जुझारू लड़ाई के लिए जागो! गोलबन्द हो! संगठित हो!
आज पूरी दुनिया में यह तथ्य स्वीकार किया जाता है कि इन मज़दूर नेताओं को केवल उनके क्रान्तिकारी विचारों और मज़दूर वर्ग को उसकी जायज़ माँगों के लिए संगठित करने के लिए पूँजीपति वर्ग की शह पर सज़ा दी गयी थी। पूँजीपति वर्ग को यह लगता था कि इसके ज़रिये वे मज़दूरों के आठ घण्टे के कार्यदिवस व अन्य माँगों के लिए उभरते आन्दोलन को कुचल सकेंगे। लेकिन हुआ इसका उल्टा। फाँसी पाने वाले एक मज़दूर नेता ऑगस्ट स्पाइस ने फाँसी की सज़ा सुनाये जाने के बाद कठघरे से ही पूँजीपति वर्ग को चुनौती देते हुए एलान किया था : “एक दिन हमारी ख़ामोशी उन आवाज़ों से कहीं ज़्यादा ताक़तवर साबित होगी, जिनका आज तुम गला घोंट रहे हो।” स्पाइस के इस एलान को इतिहास ने सही साबित किया।






















