क्रान्तिकारी मज़दूर शिक्षणमाला – 31 : मार्क्सवादी राजनीतिक अर्थशास्त्र के सिद्धान्त (खण्ड-2) अध्याय – 5 संचरण का समय और उसकी लागत
औपचारिक तौर पर हम संचरण की तीन प्रकार लागतों की बात कर सकते हैं। लेकिन इसमें केवल पहली श्रेणी यानी शुद्ध रूप से संचरण की कार्रवाई की लागतें, यानी बेचने-ख़रीदने की प्रक्रिया की लागतें और उसमें लगने वाला श्रम ही अनुत्पादक लागतें व अनुत्पादक श्रम है। बाक़ी दोनों क़िस्म की लागतें, यानी भण्डारण की लागतें और परिवहन की लागतें माल की क़ीमत में शामिल होती हैं और इसमें लगने वाला श्रम पूँजीपति के लिए उत्पादक होता है। उसके शोषण के ज़रिये भी पूँजीपति बेशी-मूल्य विनियोजित करता है। इसमें से भण्डारण की लागतें पूँजीपति की दृष्टि से उत्पादक लागतें हैं, लेकिन सामाजिक दृष्टि से वे अनुत्पादक लागतें हैं क्योंकि वे उपयोग-मूल्य में कुछ भी नहीं जोड़तीं। लेकिन परिवहन की लागतें न सिर्फ़ वैयक्तिक पूँजीपति के लिए उत्पादक लागतें हैं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी उत्पादक लागतें हैं क्योंकि जब तक उत्पादित माल उस स्थान तक नहीं पहुँच जाता जहाँ वह अपने उपभोग के लिए तैयार हो तब तक उत्पादन की प्रक्रिया जारी मानी जाती है, और साथ ही, जब तक उत्पादन के तत्व उत्पादन के स्थान पर नहीं पहुँच जाते तब तक उत्पादन की प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो सकती और इसलिए उनका उत्पादन के स्थान पर पहुँचाया जाना उत्पादन की कार्रवाई के लिए अनिवार्य होता है। इसका संचरण से सीधा कोई सम्बन्ध नहीं होता है, हालाँकि औपचारिक तौर पर ये गतिविधियाँ आयोजित संचरण के क्षेत्र में होती हैं।






















