इस ठण्डी हत्या का जिम्मेदार कौन?
एक मालिक को अमीर बनाने में दिन-रात काम करने वाले मेहनती मजदूर पप्पू के परिवार को 20 हजार देकर उसकी जिन्दगी की कीमत अदा कर मालिक एक ठण्डी हत्या से बरी हो गया। चूँकि पप्पू पक्का वर्कर नहीं था, इसलिए मालिक कह सकता था कि उसके पास तो यह व्यक्ति काम ही नहीं करता था। अदालतों में अकसर ही इंसाफ की आस लगाये हजारों लोग रोजाना चक्कर मारते हैं, इसलिए कानून से भी परिवार को कोई उम्मीद नहीं। इस तरह रोजाना कितने ही पप्पू मर जाते हैं। ऐसे करोड़ों पप्पुओं की लाशों पर अमीरों के महल आखिर कब तक खड़े होते रहेंगे?
















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