कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में अन्तरराष्ट्रीय स्त्री दिवस के अवसर पर कार्यक्रम
आज देशभर की आधी आबादी दोहरी गुलामी का शिकार है। कहीं वो दहेज के लिए जलाई जा रही है, कहीं कारख़ानों में खप रही है तो कहीं दफ़्तरों में, तो कहीं चूल्हे में ख़ुद को झोंक देने के िलए मजबूर है। अपने वजूद से बेख़बर पितृसत्ता और पूँजीवाद की गुलामी के लिए पिस रही है। साल दर साल महिला विरोधी अपराध की घटनाओं की तादाद बढ़ती जा रही है। ख़ासकर आज का दौर अगर देखा जाये जब हर ओर फासीवादी हमले हो रहे है तो महिलाएँ, अल्पसंख्यक, दलित और मज़दूर वर्ग इसका पहले शिकार हो रहे हैं।





















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