साम्प्रदायिक विरोधी संयुक्त मोर्चे द्वारा फासीवाद के खिलाफ़ ज़ोरदार रोष प्रदर्शन
बिगुल संवाददाता
विभिन्न धर्म निरपेक्ष, जनवादी, इंसाफपसंद संगठनों द्वारा गठित साम्प्रदायिकता विरोधी संयुक्त मोर्चा के साझे बैनर तले 4 नवम्बर को लुधियाना के मजदूरों, नौजवानों, छात्रों, लेखकों, बुद्धिजीवियों ने लुधियाना में डी.सी. कार्यालय पर रोष प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन आर.एस.एस. के नेतृत्व वाले भाजपा, विश्व परिषद, बजरंग दल जैसे दर्जनों हिन्दुत्ववादी साम्प्रदायिक फासीवादी संगठनों द्वारा धार्मिक अल्पसंख्यकों, दलितों, जनवादी, धर्मनिरपेक्ष, सामाजिक कार्यकर्ताओं-बुद्धिजीवियों-लेखकों के दमन, गौ रक्षा, लव जेहाद के बहाने मुस्लमानों के कत्लेआम, हिन्दु धर्म के रक्षा के नाम पर देश भर में जनमानस में साम्प्रदायिक जहर फैलाने, विचारों की आजादी पर हमलों, लोगों के अन्य सभी आर्थिक-राजनीतिक जनवादी अधिकारों पर हमलों के खिलाफ़ किया गया। वक्ताओं ने कहा कि हिन्दुत्वी कट्टरपंथी आज सब से खतरनाक साम्प्रदायिक व फासीवादी ताकत है लेकिन अन्य धर्मों से सम्बन्धित साम्प्रदायिकता भी जनता की शत्रु है। हिन्दुत्ववादी साम्प्रदायिक फासीवाद का मुकाबला अल्पसंख्यक साम्प्रदायिकता से नहीं बल्कि सारी जनता की फौलादी एकजुटता के सहारे ही किया जा सकता है। सिखों की भावनाओं के ठेस पहुँचाकर पंजाब में साम्प्रदायिक माहौल पैदा करने को संयुक्त मोर्चे ने हुक्मरानों की घटिया चालें करार देते हुए दोषियों को सख्त से सख्त सजा देने की माँग की है।
संयुक्त मोर्चे ने लोगों को आपसी सदभावना व भाईचारा मजबूत करने का आह्वान किया है। वक्ताओं ने कहा कि लोगों को हुक्मरानों की फूट डालो और राज करो की घटिया साजिशों की पहचान करते हुए इसके खिलाफ़ जुझारू जनान्दोलन का निर्माण करना होगा।
वक्ताओं ने कहा कि हिन्दु धर्म को खतरा, गाय को खतरा, तथाकथित लव-जेहाद से हिन्दु लडकियों को खतरा, आदि खतरों के हौवे इसलिए खडे किये जा रहे हैं क्योंकि हुक्मरानों को जनाक्रोश से खतरा है। मुट्ठीभर धनाढ्य वर्गों को महँगाई, बेरोजगारी, गरीबी, बदहाली से त्रस्त देश की 85 प्रतिशत आबादी से खतरा है। हुक्मरानों को लोगों की हक, सच, इंसाफ की आवाज उठाने, संगठित होने, संघर्ष करने, लिखने, बोलने, विचार व्यक्त करने के जनवादी अधिकारों से खतरा है। हुक्मरानों को देशी-विदेशी पूँजीपतियों के पक्ष में लागू की जा रही निजीकरण-उदारीकरण की नीतियों के खिलाफ़, सरकारों द्वारा श्रमिक अधिकारों के हनन, जबरन जमीनें हथियाने आदि के खिलाफ़ लोगों के आगे बढ़ रहे संघर्षों से खतरा है।
संयुक्त मोर्चे ने लेखकों, इतिहासकारों, कलाकारों द्वारा पदम भूषण, साहित्य अकादमी अवार्ड जैसे इनाम वापिस करने का जो़रदार स्वागत करते हुए अन्य लेखकों, इतिहासकारों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों को भी साम्प्रदायिक फासीवाद विरोधी आन्दोलन में शामिल होने का आह्वान किया है।
इस प्रदर्शन को बिगुल मज़दूर दस्ता के प्रतिनिधि राजविन्दर और जमहूरी अधिकार सभा के प्रतिनिधि प्रो. जगमोहन के अलावा कारखाना मज़दूर यूनियन, एटक, इंकलाबी केन्द्र पंजाब, पंजाब लोक सांस्कृतिक मंच, सीटू, गवर्नमैंट स्कूल टीचरज़ यूनियन, डी.वाई.एफ.आई., मोल्डर एण्ड स्टील वर्कर्ज यूनियन, पंजाबी साहित्य अकादमी (लुधियाना), तर्कशील सोसाइटी, इण्डियन डाक्टर्स फार पीस एण्ड डिवेलपमेंट, सर्व साझा क्रान्तिकारी मज़दूर यूनियन, डैमोक्रटिक लायरज ऐसोसिएशन, लफजों का पुल साहित्य सभा, महासभा, रेलवे पेंशनर्ज एसोसिएशन, हौज़री वर्कर्ज़ यूनियन संगठनों के प्रतिनिधियों आदि ने सम्बोधित किया। मंच संचालन बिगुल मज़दूर दस्ता के लखविन्दर व ज्वांइण्ट काउँसिल आफ ट्रेड यूनियन्स के डी.पी. मौड़ ने किया।
मज़दूर बिगुल, दिसम्बर 2015
साम्प्रदायिक फासीवाद के खिलाफ़ ज़ोरदार प्रदर्शन4 नवम्बर 2015, लुधियाना। आज विभिन्न धर्म निरपेक्ष, जनवादी, इंसाफपसंद, स…
Posted by ਜੂਝਦੇ ਜੁਝਾਰ ਲੋਕ on Wednesday, November 4, 2015













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