केन्द्रीय बजट : मज़दूर वर्ग और आम मेहनतकश जनता के शोषण को और भी बढ़ायेगा
सबसे अमीर पूँजीपतियों पर कर बढ़ाने की बात तो दूर, सरकार ने पूँजीपति वर्ग को लाभ पहुँचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। लगभग 12.2 लाख करोड़ रुपये पूँजीगत व्यय के नाम पर बाज़ार को बढ़ावा देने में खर्च होंगे, यानी ऐसे इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जायेगा जो ठेकों के माध्यम से पूँजीपतियों को लाभ पहुँचायेगा। बायोफार्मा कम्पनियों को 10,000 करोड़, सेमीकण्डक्टर क्षेत्र को 40,000 करोड़ की सब्सिडी दी जा रही है, और ‘रेयर अर्थ मिनरल कॉरिडोर’ बनाकर निजी खनन क्षेत्र को लाभ पहुँचाया जा रहा है। कमज़ोर हो चुके एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) सेक्टर को मात्र 10,000 करोड़ का प्रावधान कर सांत्वना देने की कोशिश की गयी है। क्लाउड सेवाएँ देने वाली अडानी-अम्बानी जैसी बड़ी कम्पनियों को कर में छूट दी गयी है। कृषि में ड्रोन और एआई जैसी योजनाएँ भी बड़े पूँजीपतियों को सब्सिडी देने का माध्यम हैं। विदेशी आय और सम्पत्ति की स्वैच्छिक घोषणा जैसी योजनाओं के ज़रिये काले धन को सफेद बनाने का मौका फिर से दिया गया है। मिनिमम अल्टर्नेट टैक्स (MAT) 15 प्रतिशत से घटाकर 14 प्रतिशत कर दिया गया है। व्यक्तिगत आयकर संग्रह (14.66 लाख करोड़) का कॉरपोरेट कर संग्रह (12.31 लाख करोड़) से अधिक हो जाना दिखाता है कि अब न केवल मेहनतकश तबक़ा बल्कि मध्यवर्ग भी कॉरपोरेट्स को दी जा रही रियायतों का बोझ उठा रहा है। अमीरों के लिए कॉरपोरेट्स द्वारा बनाये जाने वाले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को फण्ड किया जा रहा है, जबकि लोकल, पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों का ढाँचा लगातार जर्जर होता जा रहा है।






















