Category Archives: पूँजीवादी विकास

मुनाफ़ाख़ोर पूँजीवादी व्यवस्था, फ़ासिस्ट सरकार और पानी में फैलता ज़हर

केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड (CGWB) की 2025 की रिपोर्ट बताती है कि भारत में लगभग 20 प्रतिशत भूजल ऐसा है जिसमें नाइट्रेट, यूरेनियम और आर्सेनिक जैसे ख़तरनाक तत्व पाए गए हैं। यह रिपोर्ट बताती है कि देशभर में पानी को प्रदूषित करने वाला सबसे बड़ा केमिकल कैल्शियम बाई कार्बोनेट (CaHCO3) है। इस रिपोर्ट के मुताबिक़, साल 2023 में कुल 15259 सैम्पल लिए गए। इनमें से 20.7 प्रतिशत सैम्पल में नाइट्रेट की मात्रा BIS के मानक यानी 45 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज़्यादा थी।  भारत के 56 प्रतिशत जिले ऐसे हैं जहाँ के भूजल में नाइट्रेट की मात्रा सुरक्षित से ज़्यादा है। राजस्थान, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में यह मात्रा काफी ज़्यादा है। पश्चिम बंगाल, झारखण्ड , बिहार, उत्तर प्रदेश, असम और मणिपुर राज्यों के सैम्पल में आर्सेनिक पाया गया। देश के 263 जिले ऐसे हैं जहाँ के भूजल में फ्लोराइड तक पाया गया।

दिल्ली में हर साल प्रदूषण से हो रही हैं 17 हज़ार मौतें!! प्रदूषण प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि मुनाफ़े की व्यवस्था से पैदा हुआ संकट है!

देश की राजधानी दिल्ली में होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण अब प्रदूषण बन गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक़ दिल्ली में पिछले कुछ सालों में किसी भी अन्य बीमारी से उतनी मौतें नहीं हुई जितनी प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों के कारण हो रही हैं। दिल्ली एनसीआर की हवा की गुणवत्ता बेहद चिन्ताजनक स्थिति में पहुँच गयी है। यहाँ की हवा में साँस लेने का मतलब ज़हर पीना हो गया है। दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण इतना बढ़ जाने का कारण कोई प्राकृतिक आपदा नहीं है बल्कि इस मौजूदा मुनाफ़े पर टिकी पूँजीवादी व्यवस्था है जिसके चलते दिल्ली और आस-पास रहने वाले लोगों का स्वास्थ्य संकट की स्थिति में आ चुका है। दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के क्या क्या कारण है इस पर हम आगे आयेंगे अभी कुछ आँकड़ों के ज़रिये समझने की कोशिश करते हैं कि प्रदूषण के चलते दिल्ली के लोग कैसे धीमी मौत मरने को मजबूर हैं।

एक धनपशु के बेटे की शादी का अश्लील तमाशा और देश के विकास की बुलन्द तस्वीर!

यही तो होता है देश का विकास। समूचे देश के राष्ट्रवादी व देशभक्त एकजुट होकर अभी इसी शादी में लगे हुए हैं। यह एक प्रकार से इस समय राष्ट्रवादी होने का सबसे अच्छा तरीका है। जब देश में विकास अपने चरम पर पहुँच जाता है तब छोटी-मोटी समस्याएँ दिखनी बन्द हो जाती है। भगदड़ में लोग मर जाते हैं, नौजवानों को नौकरी नहीं मिल रही, सभी समान महँगे हो रहे हैं, मॉब लिंचिंग हो रही है, धर्म के नाम पर क़त्ल हो रहे हैं, आदि-आदि। विकास के चरम पर पहुँच कर यह सब मोहमाया दिखने लगता है। अम्बानी और उनके जमात के लोग और उन सबके चहेते मोदी जी देश को इसी विकास की चरम अवस्था में ले जाना चाहते हैं। और भाई यही तो समानता होती है!