चीन में मज़दूरों का बढ़ता असन्तोष
चीन में मज़दूर अपने इन हालातों के खि़लाफ़ निरंतर संघर्षरत है और अपनी माँगों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। यहाँ यह भी जानना दिलचस्प होगा कि चीन में केवल सरकारी नियंत्रण के तहत काम करने वाली ‘ऑल चाइना फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियन्स’ को ही सरकार द्वारा कानूनी मान्यता हासिल है। पूँजीपतियों की खि़दमत में लगी यह ट्रेड यूनियन किसी भी रूप में मज़दूरों के हितों का प्रतिनिधत्व नहीं करती और यही कारण है कि मज़दूरों को इस ट्रेड यूनियन पर राई-रत्ती भी भरोसा नहीं है। चीन की सरकार ने मज़दूरों के स्वतंत्र यूनियन बनाने के किसी भी प्रयास पर रोक लगा रखी है। मज़दूरों को अपनी पहलकदमी पर संगठित करने वाले मज़दूर कार्यकर्ताओं के प्रति सरकार का रुख़ इसी बात से समझा जा सकता उन्हें पुलिस द्वारा प्रताडि़त किया जाता है, गि़रफ्तार किया जाता है, उनके खि़लाफ़ व्यक्तिगत कुत्सा प्रचार भी किया जाता है जिसमें चीन की मीडिया बढ़-चढ़कर भूमिका निभाती है। कुछ मामलों में तो कार्यकर्ताओं को राष्ट्रीय मीडिया पर मज़दूरों को संगठित करने के अपने प्रयासों के लिए माफी तक माँगने को बाध्य किया जाता है।





















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