दमनचक्र – ‘लेनिन कथा’ से एक अंश
”देख लिया अपने ज़ार को?” गुस्से से एक युवा बोल्शेविक चिल्लाया। ”यह है तुम्हारा ज़ार, जिसमें तुम्हें इतना विश्वास था! किस निर्मम जानवर में तुमने विश्वास किया था!”
मज़दूर समझ गये। गोलियाँ ज़ार ने ही चलवायी थीं। ज़ार के ऊपर से जनता का विश्वास सदा-सदा के लिए उठ गया।
उस ख़ूनी रविवार को पीटर्सबर्ग में एक हज़ार से अधिक मज़दूर मारे गये और पाँच हज़ार घायल हुए।























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