मेहनतकश जन-जीवन पर पूँजी के चतुर्दिक हमलों के बीच गुज़रा एक और साल
दुनिया के अलग-अलग हिस्सोंे में आम मेहनतकश आबादी के जीवन पर पूँजी के चतुर्दिक हमलों के प्रतिकार के भी कुछ शानदार उदाहरण इस साल देखने को मिले जिनसे इस अन्धकारमय दौर में भी भविष्य के लिए उम्मीदें बँधती हैं। भारत की बात करें तो इस साल बेंगलूरू के टेक्सटाइल उद्योग की महिला मज़दूरों ने मोदी सरकार की ईपीएफ़ सम्बन्धी मज़दूर विरोधी नीति के विरोध में ज़बरदस्त जुझारूपन का परिचय देते हुए समूचे बेंगलूरू शहर को ठप कर दिया। बेंगलूरू की महिला टेक्सटाइल मज़दूरों के जुझारू संघर्ष को देखते हुए केन्द्र सरकार बचाव की मुद्रा में आ गयी। इसी तरह से राजस्थान के टप्पूखेड़ा में होण्डा कम्पनी द्वारा 3000 मज़दूरों के निकाले जाने के बाद शुरू हुआ होण्डा मज़दूरों का जुझारू संघर्ष भी प्रेरणादायी रहा।























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