उत्तराखण्ड पुलिस के लिए मज़दूरों को न्यूनतम मज़दूरी की माँग पर जागरूक करना “अराजकता और अशान्ति फैलाना” है!
इस क्षेत्र में मज़दूरों को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक और संगठित करने के प्रयास हिन्दुत्ववादी संगठनों को बहुत नागवार गुज़रते हैं और वे पहले भी कई बार ऐसे प्रचार अभियानों पर हमला करने की कोशिश कर चुके हैं लेकिन मज़दूरों के विरोध के कारण उनकी दाल नहीं गलती थी। इस बार भी जब उनकी धमकियों, मारपीट, पर्चे फाड़ने का कोई असर होता नहीं दिखा तो उन्होंने पुलिस को बुला लिया। ग़रीबों के साथ होने वाले अपराधों की सूचना मिलने के बाद भी घण्टों तक न पहुँचने वाली पुलिस फ़ौरन हाज़िर हो गयी।






















