पुलिस हिरासत में बढ़ती मौतें
हमारे लिए हमारे साथ होने का दम भरने वाली पुलिस द्वारा कानून-व्यवस्था का नाम लेकर आम सीधो-साधो नागरिकों पर आतंक का जंगलराज कायम किया जाता है। जुल्म और अन्याय के ख़िलाफ आवाज उठाने वालों को पुलिस दमन का शिकार होना पड़ता है। लेकिन सोचने की बात है कि क्या पुलिस के लोग इतने दरिन्दे और वहशी जन्मजात होते हैं या उन्हें वैसा बनाया जाता है। यह व्यवस्था उन्हें वैसा बनाती है, ताकि आम जनता में भय और दहशत फैलाकर निरंकुश पूँजीवादी लूट को बरकरार रखा जा सके। जिस तरह से समाज में आम बेरोजगारों की फौज खड़ी है, उन्हीं में से वेतनभोगियों की नियुक्ति की जाती है और अनुभवी घाघ नौकरशाहों की देखरेख में उन्हें समाज से पूरी तरह काटकर उनका अमानवीकरण कर दिया कर जाता है और इस व्यवस्था रूपी मशीन का नट-बोल्ट बना दिया जाता है।





















Recent Comments