वेनेज़ुएला पर अमेरिकी साम्राज्यवादी हमला – ट्रम्प के ज़रिये उजागर हो रहा है साम्राज्यवाद का बर्बर मानवद्रोही चेहरा
क़रीब दो महीने पहले ट्रम्प प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा सम्बन्धी एक दस्तावेज़ में ट्रम्प प्रशासन ने कुख़्यात मुनरो डॉक्ट्रिन को फिर से लागू करने की बात कही है जिसके तहत पूरे अमेरिकी महाद्वीप में किसी दूसरी ताक़त के वर्चस्व को ख़त्म कर निर्विवाद रूप से अमेरिकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को क़ायम करने का लक्ष्य रखा गया है। ग़ौरतलब है कि पिछले दो दशकों के दौरान वेनेज़ुएला सहित लातिन अमेरिका के अन्य देशों में चीन ने बुनियादी ढाँचे सहित अर्थव्यवस्था के कई सेक्टरों में ज़बर्दस्त निवेश किया है और उन देशों के साथ बड़े पैमाने पर व्यापारिक सम्बन्ध स्थापित किये हैं। वेनेुज़ुएला के तेल का सबसे बड़ा ख़रीदार भी चीन ही है। वेनेज़ुएला की चीन व रूस के साम्राज्यवादी धड़े से घनिष्ठता इस तथ्य से भी दिखती है कि वह अमेरिका के बरक्स ब्रिक्स देशों के गठबन्धन में भी शामिल होने की आकांक्षा रखता है और चीन के साथ व्यापार में अमेरिकी डॉलर के बजाय चीन की मुद्रा युआन का इस्तेमाल करता है जिसकी वजह से विश्व व्यापार में अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को चुनौती मिल रही है। यही नहीं वेनेज़ुएला सहित लातिन अमेरिका के कई देश रूस व चीन से हथियारों और सुरक्षा उपकरणों की ख़रीद भी करते आये हैं। इन सभी कारणों से ही वेनेज़ुएला और लातिन अमेरिका के अन्य देश ट्रम्प के निशाने पर हैं।













