शान्ति काल में पूँजी के हाथों हुए सबसे बड़े हत्याकाण्ड का नाम है भोपाल
मुनाफे की हवस में भागती पूँजी की रक्तपिपासु राक्षसी की प्यास इंसानी ज़िन्दगियों को हड़पे बिना शान्त नहीं होती। पूँजीवाद का पूरा इतिहास बर्बर हत्याकाण्डों और नृशंस जनसंहारों से भरा हुआ है। मुनाफे के बँटवारे के लिए लड़े जाने वाले युद्धों के दौरान वह हिरोशिमा और नागासाकी जैसे हत्याकाण्ड रचता है और शान्ति के दिनों में भोपाल जैसे जनसंहारों को अंजाम देता है। कम से कम बीस हज़ार लोगों को मौत के घाट उतारने और करीब छह लाख लोगों को अन्धेपन से लेकर दमा जैसी बीमारियों का शिकार बनाने वाली इस घटना को दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटना कहा जाता है, लेकिन वास्तव में यह दुर्घटना नहीं थी। इस हादसे ने एक बार फिर बस यही साबित किया कि पूँजीपतियों के लिए इंसानों की ज़िन्दगी मुनाफे से बढ़कर नहीं होती। एक ओर मुनाफे के लिए बेहद ज़हरीली गैसें तैयार की जाती हैं और दूसरी ओर पैसे बचाने के लिए सुरक्षा के सारे इंतज़ाम ताक पर धर दिये जाते हैं।

















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