गैस-सिलेण्डर के बढ़ते संकट और मोदी सरकार की चुप्पी के ख़िलाफ़ देश भर में आक्रोश प्रदर्शन!
बिगुल संवाददाता
28 फ़रवरी को साम्राज्यवादी अमेरिका और ज़ायनवादी इज़रायल द्वारा ईरान की राष्ट्रीय सम्प्रभुता की धज्जियाँ उड़ाते हुए किये गये हमले के बाद पूरी दुनिया ऊर्जा संकट से जूझ रही है। भारत की आम मेहनतकश जनता को भी रसोई गैस सिलेण्डर की भयंकर कमी का सामना करना पड़ रहा है।
भारत में यह संकट मोदी सरकार की ग़लत नीतियों और घोर लापरवाही के कारण पैदा हुआ है। फ़ासिस्ट मोदी सरकार की इस चुप्पी, बदइन्तज़ामी और अमेरिका-इज़रायल के साम्राज्यवादी मंसूबों के ख़िलाफ़ देश के कई राज्यों में भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (RWPI) समेत कई छात्र, युवा, नागरिक व मज़दूर संगठनों द्वारा प्रदर्शन किया गया। ये प्रदर्शन दिल्ली, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना से लेकर हरियाणा, उत्तरप्रदेश, बिहार आदि राज्यों में हुए।
दिल्ली के जन्तर मन्तर पर आयोजित आक्रोश प्रदर्शन में भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (RWPI), नौजवान भारत सभा, दिशा छात्र संगठन, मज़दूर बिगुल के वक्ताओं ने सभा को सम्बोधित किया। शाहबाद डेयरी में भी पर्चा वितरण कर महाराणा प्रताप चौक पर सरकार की बदइन्तज़ामी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया गया।
बिगुल संवाददाता से बात करते हुए लोगों ने बताया कि एक तो गैस सिलेण्डर जल्दी मिल नहीं रहा है और अगर मिल भी रहा है तो 300-400 रुपये किलो, दूसरी तरफ़ लकड़ियों के दाम भी बढ़ गये हैं। 8 से 10 हज़ार रुपये महीने कमाने वालों के लिये घर चलाना मुश्किल हो गया है। प्रदर्शन में आये लोगों ने बताया कि एलपीजी गैस और पेट्रोल-डीज़ल महँगा होने पर अन्य वस्तुएँ भी महँगी हो रही हैं। गैस सिलेण्डर न मिलने के कारण खाने-पीने की छोटी दुकानें बन्द हो गयी हैं। हमेशा की तरह मोदी सरकार ने तेल और गैस के संकट से निपटने के लिए कोई योजना नहीं बनायी। जिस तरह कोरोना काल में इस सरकार ने संकट से निपटने के लिए कोई तैयारी नहीं की थी और लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया था, ठीक उसी तरह आज भी गैस संकट से उबरने की कोई पूर्वयोजना मोदी सरकार ने नहीं बनायी और लोग एक बार फिर लापरवाही की मार झेल रहे हैं।
गैस-सिलेण्डर की माँग करने और सरकार की बदइन्तज़ामी के ख़िलाफ़ बोलने पर मोदी सरकार इस संकट के वक़्त भी लोगों का दमन करने से नहीं चूक रही है। मुम्बई के मानखुर्द स्थित संविधान चौक पर एलपीजी की माँग करते हुए शान्तिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे RWPI कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों पर महाराष्ट्र पुलिस ने लाठीचार्ज किया। महाराष्ट्र पुलिस ने बर्बरता की हदें पार करते हुए नाबालिग बच्चों और गर्भवती महिला तक को नहीं बख्शा। RWPI के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर उनपर आपराधिक मामला दर्ज कर दिया गया। स्थानीय लोगों ने थाने का घेराव कर हिरासत में लिये गये अपने साथियों को छुड़ाया और पुलिसिया दमन के ख़िलाफ़ रैली निकाली। यह दिखाता है कि फ़ासिस्ट सत्ता जनता की एकजुटता और विरोध की आवाज़ से कितना डरती है। दमन के बावजूद भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी ने महाराष्ट्र के पुणे और अहिल्यानगर में भी प्रदर्शन किया।
आन्ध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम और विजयवाड़ा में नौजवान भारत सभा की तरफ़ से विरोध प्रदर्शन किया गया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि साम्राज्यवादी युद्ध की मार आम जनता झेल रही है। ख़बरों के मुताबिक़ गैस के दाम बढ़ने से हर परिवार पर हर महीने कम से कम 700 रुपये तक का बोझ बढ़ जाएगा। हजारों करोड़ का बोझ अकेले आन्ध्र प्रदेश की जनता पर है। विश्व गुरु का होने का ढोल पीटने वाली मोदी सरकार इस पूरे संकट पर ठोस क़दम उठाने के बजाय इस संकट से ही इनकार कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि गैस एजेंसियों और सीएनजी पम्पों के बाहर लम्बी-लम्बी लाइनें लगी हैं। कई-कई घण्टों तक इन्तज़ार करने के बाद भी लोगों को सिलेण्डर नहीं मिल रहा। हर बीतते दिन के साथ यह संकट और बढ़ता जा रहा है।
बड़े पैमाने पर सिलेण्डर की कालाबाज़ारी शुरू हो गयी है। अमीर तो पैसे के दम पर ब्लैक में सिलेण्डर हासिल कर ले रहे हैं, लेकिन ग़रीबों के घरों में चूल्हा जलने पर भी संकट आ गया है। प्रवासी मज़दूरों-मेहनतकशों की बड़ी आबादी के पास गैस कनेक्शन नहीं है, इसलिए वे छोटे सिलेण्डरों का इस्तेमाल करते हैं। अब उन्हें मजबूरन 300-400 रुपये किलो गैस ख़रीदना पड़ रहा है। कुछ मज़दूर बस्तियों से लोग पलायन करने को मजबूर हैं। 7 मार्च को सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेण्डर में 60 रुपये और कमर्शियल सिलेण्डर में 115 रुपये बढ़ा दिये।
तेलंगाना, बिहार, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद, बनारस, गोरखपुर, मऊ और लखनऊ में पर्चा वितरण, रैली और सभाएँ की गयीं।
जनवरी के महीने में ही यह साफ़ हो गया था कि अमेरिका और इज़रायल ईरान पर कभी भी हमला कर सकते हैं और उसका असर हमारे देश में गैस और पेट्रोल की भारी किल्लत के रूप में सामने आयेगा। इसके बावजूद इस संकट से निपटने के लिए मोदी सरकार कोई योजना बनाने की बजाय इज़रायल से गलबहियाँ करने में मगन रही और एक बार फिर जनता को मरने के लिए छोड़ दिया। इस संकट के दौर में तेल को संरक्षित करने के बजाय सरकार तेल निर्यात कर रही है ताकि रिलायंस जैसी कम्पनियों के मुनाफ़े में कोई रुकावट ना आये, भले ही इसका ख़ामियाजा देश की आम जनता को भुगतना पड़े। 56 इंच का सीना फुलाने वाला प्रधानमंत्री अमेरिका और इज़रायल केे हमले पर कोई पक्ष लेने के बजाय चुप्पी साधकर बैठा है और चुनावी रैलियाँ करने में व्यस्त है। अम्बानी-अडानी जैसे पूँजीपतियों के मुनाफ़े की दर को बरकरार रखने के लिए जनता को मरता हुआ छोड़ धीरज, संयम और शान्ति बरतने की सलाह दे रहा है।
मेहनतकश दोस्तो, हमें पिछले अनुभवों से सबक लेते हुए इस संकट को चुपचाप सहते रहने के बजाय सरकार पर दबाव बनाना होगा कि वह इस साम्राज्यवादी युद्ध में सही पक्ष ले और अमेरिका और इज़रायल पर युद्ध ख़त्म करने के लिए दबाव बनाये। इसके साथ ही देश की आम जनता तक सस्ते दरों पर गैस-सिलेण्डर पहुँच पाये, यह सुनिश्चित करें और इसकी कालाबाज़ारी पर रोक लगाये। इसके अलावा, पेट्रोल व डीज़ल पर लगाये गये भारी टैक्सों को तत्काल कम किया जाये।
मज़दूर बिगुल, मार्च 2026




















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