महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के जन्मदिवस (14 मार्च) के अवसर पर उनके प्रसिद्ध लेख के अंश समाजवाद ही क्यों?
मैं अब उस बिन्दु पर पहुँच गया हूँ जहाँ मैं संक्षेप में यह बता सकता हूँ कि मेरी राय में हमारे समय के संकट का सार क्या है। यह व्यक्ति के समाज से सम्बन्ध का सवाल है। व्यक्ति समाज पर अपनी निर्भरता के बारे में पहले से कहीं अधिक सचेत हो गया है। परन्तु वह इस निर्भरता का अनुभव एक सकारात्मक गुण, एक आवयविक सम्बन्ध, एक सुरक्षात्मक बल के रूप में नहीं, बल्कि अपने प्राकृतिक अधिकारों, या यहाग् तक कि अपने आर्थिक अस्तित्व के लिए एक ख़तरे के रूप में करता है।














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