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बजाज व जेसीबी-पास्को कम्पनी के पास चलाया गया ‘मज़दूर बिगुल’ अख़बार का वितरण अभियान

निराशा नहीं, आशा! आत्म समर्पण नहीं, संघर्ष! बजाज व जेसीबी-पास्को कम्पनी के पास चलाया गया ‘मज़दूर बिगुल’ अख़बार का वितरण अभियान! बीते 17 नवम्बर को गुड़गाँव (हरियाणा) स्थित बजाज व…

मारुति-सुज़ुकी कम्पनी के पास चलाया गया ‘मज़दूर बिगुल’ अख़बार का वितरण अभियान!

‘हमें स्थायी, सुरक्षित व रोज़गार के अधिकार के लिए एकजुट होकर संघर्ष की शुरुआत करनी ही होगी। इतिहास में मज़दूर वर्ग ने अपनी एकजुट ताक़त से संघर्षों को आगे बढ़ाया था और उसी से सीखकर आज हमें संघर्ष को लड़ना होगा।

बिगुल मज़दूर दस्ता ने मज़दूर बिगुल अख़बार का प्रचार–अभियान चलाया।

‘आज ज़रूरत है ऐसे अख़बारों, चैनलों और सोशल–मीडिया साइटों की, जो जनता तक सही सूचनाएँ पहुँचाने के साथ–साथ घटित घटनाओं का सही विश्लेषण भी लोगों तक पहुँचाएँ। आज हमें एक वैकल्पिक मीडिया–तंत्र खड़ा करने की मुहिम में शामिल होना ही होगा। मज़दूर बिगुल अख़बार उसी का एक अंग है।
लोगों ने अख़बार लेने के साथ–साथ अपना सम्पर्क–नम्बर भी दर्ज़ करवाया।

हैदराबाद की मज़दूर बस्‍ती में अक्‍टूबर क्रान्ति की विरासत से प्रेरणा लेने का संकल्‍प लिया गया

‘सभा का समापन क्रान्तिकारी गीतों और नारों से हुआ। कई मज़दूरों ने अपने संपर्क दिये और बिगुल मज़दूर दस्ता के कार्यकर्ताओं को अपने घरों में चाय पर बुलाया। इस प्रकार वह शाम रामिरेड्डी नगर के लिए अक्टूबर क्रान्ति की उपलब्धियों को याद करने और आज भारत के मज़दूर वर्ग के सम्‍मुख उपस्थित चुनौतियों को चिह्न‍ित करने वाली यादगार शाम बन गयी।

बिगुल मज़दूर दस्ता द्वारा गुड़गाँव (हरियाणा) स्थित रिको कम्पनी के पास मज़दूर बिगुल अख़बार का वितरण अभियान चलाया गया

‘बिगुल अख़बार सिर्फ़ मज़दूरों के कार्यस्थलों व रिहायशी समस्याओं को ही नहीं उठाता बल्कि उन्हें उनके ऐतिहासिक मिशन यानी मज़दूर राज की स्थापना के लिए संघर्ष से भी परिचित करवाता है। आज मज़दूर वर्ग का अपना क्रान्तिकारी मीडिया ही उसे सही विचारों से लैस करके वर्गीय चेतना पैदा कर सकता है और संघर्षों को सही दिशा दे सकता है। ‘मज़दूर बिगुल’ किसी पूँजीपति या कॉरपोरेट के पैसों पर नहीं, बल्कि मज़दूर-मेहनतकश और इन्साफ़पसन्द लोगों के सहयोग से संचालित होता है।

अक्टूबर क्रान्ति की 108वीं वर्षगाँठ पर हैदराबाद के औद्योगिक क्षेत्र की मज़दूर बस्ती में जुलूस और जनसभाओं का आयोजन

‘हमें अक्‍टूबर क्रान्ति की विरासत को फिर से जीवित करने की ज़रूरत है।
जुलूस के दौरान कई मज़दूरों ने अपनी वर्तमान परिस्थितियों पर गहरे असंतोष और रोष व्यक्त किया तथा रूस में समाजवाद के दौर केसमाज को समझने में रुचि दिखाई। उन्होंने अक्तूबर क्रांति की विरासत को समझने में भी गहरी दिलचस्पी दिखाई। मज़दूरों ने कार्यकर्ताओं को अपने सम्‍पर्क दिये और अभियान के लिए बढ़चढ़कर सहयोग भी किया।

मारुति-सुज़ुकी कम्पनी और बजाज कम्पनी के पास के पास चलाया गया ‘मज़दूर बिगुल’ अख़बार का वितरण अभियान!

‘किसी मसीहा-अवतार के इन्तज़ार करने की बजाये अपनी तैयारी तेज़ करनी होगी। मज़दूर बिगुल अख़बार को नियमित पढ़े, अपने साथ कारखाना में हो रहे शोषण व रिहायशी इलाकों के जीवन स्थितियों की मुश्किल हालात पर रिपोर्ट भेजे। मज़दूर बिगुल अख़बार मज़दूरों के साथ-साथ कदम मिलाकर चलने के लिए तैयार है। हमसे सम्पर्क करें।

मुम्बई के मानखुर्द-गोवंडी इलाके में मज़दूर बिगुल वितरण अभियान चलाया गया

‘लोगों ने बिगुल अख़बार लिया, आज की समस्याओं पर बात रखी और हमसे जुड़ने के लिए अपने संपर्क नंबर दिये। इस पूरे अभियान के तहत एक स्वतंत्र वैकल्पिक मीडिया खड़ा करने की मुहिम को लोगों से अच्छा प्रतिसाद मिला।

हैदराबाद की मज़दूर बस्‍ती में चलाया गया मज़दूर बिगुल वितरण अभियान

‘कार्यकर्ताओं ने मज़दूरों बताया कि आज मज़दूर संगठित नहीं है इसलिए सरकार की देख-रेख में फ़ैक्ट्री मालिक मज़दूरों का बेहिसाब शोषण कर रहे हैं। ऐसे में मज़दूरों को संगठित करने के उद्देश्य से बिगुल अध्ययन मण्‍डल चलाने के बारे मज़दूरों को बताया गया। कई मज़दूरों ने अध्ययन मण्‍डल में शामिल होने में दिलचस्‍पी दिखाई।

हीरो मोटोकार्प और रिको कम्पनी के मज़दूरों के बीच चलाया गया ‘मज़दूर बिगुल’ का वितरण अभियान!

‘मज़दूर बिगुल अख़बार इसी मक़सद से निकाला जा रहा है कि पूरे देश के मज़दूरों को एकजुट किया जा सके और मज़दूरों के शोषण पर टिकी इस व्यवस्था को ख़त्म किया जा सके। इसलिए आज ऑटोमोबाइल सेक्टर समेत हर सेक्टर और इलाक़े में मज़दूरों-मेहनतकशों को संघर्षों का नये सिरे से आगाज़ करना होगा।