महान अक्टूबर क्रान्ति की 108वीं वर्षगाँठ के अवसर पर बिगुल मज़दूर दस्ता ने गत 26 अक्टूबर को हैदराबाद के जीडीमेटला औद्योगिक क्षेत्र के पास स्थित मज़दूर बस्ती रामिरेड्डी नगर में क्रान्तिकारी नारों के साथ जुलूस निकाला, पर्चे बाँटे और जनसभाओं के ज़रिये अक्टूबर क्रान्ति के इतिहास और उसकी विरासत के बारे में मज़दूरों को जागरूक किया।मजदूरों को बताया गया कि 108 वर्ष पहले रूस में मज़दूरों ने अक्टूबर क्रान्ति के ज़रिये अपना शासन स्थापित कर लिया था और पूँजीपति वर्ग के शासन को उखाड़ फेंका था। मज़दूरों ने अपने शासन की स्थापना कर दुनिया को दिखा दिया था कि जो हाथ मशीनें चलाते हैं, वे सरकार भी चला सकते हैं। इस क्रान्ति ने न सिर्फ़ मज़दूरों का जीवन बदला बल्कि पूरे समाज की संरचना को आमूलचूल रूप से परिवर्तित कर दिया था। मज़दूरों के राज यानी समाजवाद में पहली बार ऐसा हुआ कि मज़दूरों का श्रम मुट्ठी भर मालिकों के मुनाफ़े के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज की भलाई के लिए लगाया गया। मज़दूरों को भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित सभी बुनियादी हक़ हासिल हुए और वे इंसान की तरह जी सके। जिन्होंने अन्न उगाया वे भूख से नहीं मरे, जिन्होंने मकान बनाए उन्हें रहने के लिए घर मिला, जिन्होंने अपने श्रम से मशीनें चलाईं उन्होंने देश भी चलाया। उस समाज में ग़रीबी, भुखमरी, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और वेश्यावृत्ति जैसी समस्याओं का समाधान हो गया था।
लेकिन आज रूस की महान मज़दूर क्रान्ति के 108 साल बाद दुनियाभर में मज़दूरों के रहे-सहे अधिकार भी छीने जा रहे हैं। हमारे अपने देश में रोज़ाना हज़ारों मज़दूर कारख़ानों में काम करते हुए घायल होते हैं, किसी के हाथ या उँगलियाँ कट जाती हैं, कोई अपनी जान गंवा देता है। कार्यस्थल पर मज़दूरों का श्रम निचोड़ा जा रहा है ताकि मालिक मुनाफा कमा सकें, जबकि मेहनतकश वर्ग बदहाल जीवन जीने को मजबूर है। इस भीषण अन्याय के ख़िलाफ़ संघर्ष ज़रूरी है, और यह तभी संभव है जब मज़दूर जाति, धर्म, क्षेत्र, भाषा जैसी सारी दीवारें तोड़कर एकजुट हों। हमें अक्टूबर क्रान्ति की विरासत को फिर से जीवित करने की ज़रूरत है।
जुलूस के दौरान कई मज़दूरों ने अपनी वर्तमान परिस्थितियों पर गहरे असंतोष और रोष व्यक्त किया तथा रूस में समाजवाद के दौर केसमाज को समझने में रुचि दिखाई। उन्होंने अक्तूबर क्रांति की विरासत को समझने में भी गहरी दिलचस्पी दिखाई। मज़दूरों ने कार्यकर्ताओं को अपने सम्पर्क दिये और अभियान के लिए बढ़चढ़कर सहयोग भी किया।













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