बिगुल मज़दूर दस्ता ने गत 19 अक्टूबर को जीडीमेटला औद्योगिक क्षेत्र, हैदराबाद के राम्मी रेड्डी नगर में मज़दूर बिगुल अख़बार का घर-घर वितरण अभियान चलाया। मज़दूर बिगुल अख़बार के महत्व और ज़रूरत पर बात रखते हुए मज़़दूरों को बताया गया कि आज देश भर में मीडिया का लगाम पूँजीपतियों के हाथों में है। गोदी मीडिया के ज़रिये हम तक पहुँचने वाली ख़बरों के ज़रिये पूँजीवादी शासक वर्ग की सोच हम पर थोपी जाती है। ऐसे में मज़दूर भी शासक वर्ग के नज़रिये से समाज को देखने लगते हैं। यह मज़दूर वर्ग को संगठित होने में बाधा पैदा करता है। मेहनतकशों को देश-विदेश की घटनाएँ, सरकार की नीतियों, फ़ैक्ट्रियों में काम करने की स्थिति पर मज़दूर वर्ग के नज़रिये से समझना चाहिए।
कई प्रवासी मज़दूर इस माह वेतन नहीं मिलने के चलते बिगुल अख़बार नहीं ले सके। यूपी, बिहार, उड़ीसा के रहने वाले मज़दूरों ने बताया कि त्योहार में कई मज़दूर घर जाएँगे। फ़ैक्ट्री मालिक मज़दूरों को लम्बी छुट्टी पर जाने से या काम छोड़ कर जाने से रोकने के लिए उन्हें देर से वेतन दे रहे हैं या पूरा वेतन नहीं दे रहे हैं। काम करने के बावजूद मज़दूरों का वेतन रोका जा रहा है और इस अंधेरगर्दी पर लगाम लगाने वाला कोई नहीं है।
मज़दूरों ने बिगुल मज़दूर दस्ता के कार्यकर्ताओं को बताया कि ज़्यादातर फ़ैक्ट्रियों में मज़दूरों को कोई पहचान पत्र, ईएसआई नहीं दिया जाता है। ऐसे में दुर्घटना होने पर फ़ैक्ट्री प्रशासन अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ देता है। फ़ैक्ट्री मालिकों का मनमाने तरीक़े से मज़दूरों से काम लेना साफ़ दर्शाता है कि सरकार की देख-रेख में धड़ल्ले से मज़दूरों का शोषण हो रहा है।
कार्यकर्ताओं ने मज़दूरों बताया कि आज मज़दूर संगठित नहीं है इसलिए सरकार की देख-रेख में फ़ैक्ट्री मालिक मज़दूरों का बेहिसाब शोषण कर रहे हैं। ऐसे में मज़दूरों को संगठित करने के उद्देश्य से बिगुल अध्ययन मण्डल चलाने के बारे मज़दूरों को बताया गया। कई मज़दूरों ने अध्ययन मण्डल में शामिल होने में दिलचस्पी दिखाई।