बिगुल मज़दूर दस्ता और नौजवान भारत सभा की ओर से इलाहाबाद के विभिन्न हिस्सों में चार लेबर कोड के ख़िलाफ़ अभियान चलाया जा रहा है।
‘अब पूँजीपति वर्ग को मज़दूरों-मेहनतकशों को मनमाने तरीके से निचोड़ने की खुली छूट मिल चुकी है। यही कारण है कि अम्बानी, अदानी, टाटा, बिड़ला जैसे पूँजीपति चुनावों में हजारों-करोड़ रुपये पानी की तरह बहा कर फ़ासिस्टों को सत्ता में पहुँचा रहे हैं।
सभा के दौरान व्यापक पर्चा वितरण किया गया और क्रान्तिकारी गीत गाये गये।
सभा के दौरान व्यापक पर्चा वितरण किया गया और क्रान्तिकारी गीत गाये गये।
Repeal the four anti-worker, anti-employee Labour Codes!
‘Job security has fallen into a severe crisis, contract and casual employment have grown sharply, and working hours have increased without any reduction. Therefore, they called upon the entire working class of India, organised and unorganised sector workers, to unite and carry out an indefinite strike until the fascist Modi government withdraws its four labour codes. They also appealed to workers to exert pressure on their own union leaderships to take up this call.
अंकुर उद्योग लिमिटेड, गोरखपुर के मज़दूर हड़ताल पर
अंकुर उद्योग लिमिटेड, गोरखपुर के मज़दूर हड़ताल पर अंकुर उद्योग लिमिटेड, बरगदवां, गोरखपुर के मज़दूर पिछले तीन दिनों से हड़ताल पर हैं। पिछले दिनों फ़ैक्ट्री प्रबन्धन द्वारा मज़दूरों का वेतन…
मज़दूर विरोधी चार लेबर कोड रद्द करो, रद्द करो।।
‘ये मज़दूरों के निशस्त्रीकरण की योजनाबद्ध तैयारी है। आज ज़रूरत इस बात की है कि देश के सत्तर करोड़ मज़दूरों को इसके ख़तरों से परिचित करवाया जाए। पूरे देश में कार्यरत श्रमिक संगठनों को इस काम को हाथ में लेना चाहिए और अनिश्चितकालीन आम हड़ताल की तैयारी करनी चाहिए।
पायलट और विमान कर्मचारियों के हितों को ताक पर रखकर मोदी सरकार की देश के पूँजीपतियों के प्रति वफ़ादारी एक बार फिर ज़ाहिर हुई!
‘आज जो इण्डिगो खुलेआम कर रहा है, वह इस व्यवस्था के भीतर पूँजीपति वर्ग द्वारा सुनिश्चित किये जाने वाले कामों के हालातों और बुनियादी सुरक्षा के मानकों का भी उल्लंघन है। हम यह माँग करते हैं कि इण्डिगो कर्मचारियों के ऊपर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए एफ़डीटीएल तत्काल प्रभाव में लागू किया जाये। साथ ही इण्डिगो द्वारा एफ़डीटीएल न लागू करने और इसकी वजह यात्रियों को जो परेशानी हुई है, उसके ख़िलाफ़ इण्डिगो पर सख़्त कार्रवाई की जाये, और तात्कालिक तौर पर उड़ानों की स्थिति को सुधारने के लिए सरकार त्वरित तौर पर हस्तक्षेप करे।
मज़दूर–विरोधी चार लेबर कोड के ख़िलाफ़ बिगुल मज़दूर दस्ता ने प्रचार–अभियान चलाया।
‘बिगुल मज़दूर दस्ता के कार्यकर्ता लगातार यही काम कर रहे हैं। प्रचार–अभियान के दौरान लोगों के बीच लेबर कोडों के मज़दूर–विरोधी चरित्र का पर्दाफ़ाश किया गया तथा 3 दिसम्बर को दिल्ली के जन्तर–मन्तर पर चार लेबर कोडों के विरोध में होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की गयी। लोगों के बीच पर्चा–वितरण भी किया गया।
हैदराबाद की मज़दूर बस्ती सुभाष नगर में अक्टूबर क्रान्ति के अवसर पर जुलूस और जनसभाओं का आयोजन
‘मज़दूरों ने सभाओं के दौरान कही गई बातों से सहमति जताई और उन्होंने अधिक जानकारी प्राप्त करने में दिलचस्पी दिखाते हुए कार्यकर्ताओं से सम्पर्क किया। उन्होंने अपने नम्बर साझा किए और आगे चर्चा के लिए बैठकों में भाग लेने की इच्छा व्यक्त की।
दिल्ली के मेट्रो विहार इलाक़े में क्रान्तिकारी अख़बार ‘मज़दूर बिगुल’ प्रचार एवं वितरण अभियान चलाया गया।
‘स्थानीय लोगों ने हमारी बातों को ध्यान सुना तथा अपनी सहमति जतायी। हमसे अख़बार लिये और विभिन्न मुद्दों पर अपनी ओर से भी बातें रखीं।
मज़दूर बिगुल अख़बार का अभियान
‘मज़दूर बिगुल अख़बार मज़दूरों-मेहनतकशों का अपना क्रान्तिकारी राजनीतिक अख़बार है जो मज़दूर वर्ग को न सिर्फ़ उनके रोज़मर्रा के मसलों पर सही नज़रिया देता है बल्कि देश और दुनिया की तमाम घटनाओं पर मज़दूर वर्गीय पक्ष रखता है और इस शोषणकारी व्यवस्था के ख़िलाफ़ उन्हें एकजुट-संगठित होने का और अपने संघर्ष को आगे बढ़ाने का सही रास्ता भी बताता है।
हैदराबाद के जीडीमेटला औद्योगिक क्षेत्र की मज़दूर बस्ती में मज़दूर बिगुल का घर–घर अभियान।
‘कई मज़दूरो ने बिगुल के कार्यकर्ताओं को तुरन्त पहचान लिया, क्योंकि पिछले सप्ताह अक्टूबर क्रान्ति की सालगिरह के अवसर पर उनके क्षेत्र में एक नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया था। उन्होंने कार्यकर्ताओं का अपने घरों में गर्मजोशी से स्वागत किया। इस सकारात्मक व्यवहार का असर यह रहा कि लोगों में मासिक अख़बार के प्रति गहरी रुचि देखी गई। कई निवासियों ने अख़बार की प्रतियाँ खरीदीं, जो इस बात का संकेत है कि मज़दूरों में अपने संघर्षों को मज़दूर वर्ग के नज़रिये से समझने वाले साहित्य से जुड़ने की इच्छा बढ़ रही है।























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