नारायणमूर्ति का एक और नारायणी प्रवचन : हफ़्ते में 70 घण्टे काम करो!
जहाँ तक काम के घण्टे निर्धारित करने का मामला है, 1921 में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के समझौते के मुताबिक हफ्ते में 48 घण्टे काम करने का मानक निर्धारित किया गया था। 1935 आते-आते पश्चिमी देशों ने इसे घटाकर 40 घण्टे कर दिया! कुछ पश्चिमी देश तो हर 10 साल में काम के घण्टों को कम करते रहते हैं। लेकिन भारत में इसके 100 साल बाद भी 48 घण्टे का ही कानून लागू है। जबकि 8 घण्टे का काम, 8 घण्टे आराम, 8 घण्टे मनोरंजन का नारा दुनिया के मजदूर वर्ग ने 1880 के दशक में ही दिया था! तब से लेकर अब तक पूरी दुनिया में तकनीक, कौशल और उत्पादकता में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है! आज प्रौद्योगिकी के जिस स्तर पर दुनिया खड़ी है वहाँ दो से चार घण्टे काम करके ही उत्पादन की ज़रूरत को आसानी से पूरा किया जा सकता है! इसके साथ ही सभी का जीवन स्तर कई गुना बढ़ाया जा सकता है!




















