कांग्रेस का मुस्लिम प्रेम एक छलावा है!
मुस्लिम आबादी को वोट बैंक के रूप में ही देखा जाता है और धर्म को सिक्के के रूप में वोट बैंक की राजनीति में इस्तेमाल किया जाता रहा है। मुस्लिम आबादी के सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करने की दिशा में किसी भी पार्टी ने अभी तक कोई काम नहीं किया है। इधर धार्मिक नेता भी अपना उल्लू सीधा करने के लिए इन्हें पिछड़ेपन में जकड़े रहना चाहते हैं, ये आम मुस्लिम आबादी की दुर्दशा की बात नहीं करते हैं। बल्कि इसके विपरीत धार्मिक कट्टरपंथ को बनाये रखने का काम मुस्लिम कट्टरपंथ बखूबी करता है। इस मुस्लिम कट्टरपंथ के खेल का फ़ायदा भी हिन्दू धार्मिक कट्टरपंथ ही उठाता है।














