क्रान्तिकारी कवि ‘पाश’ के शहादत दिवस 23 मार्च के अवसर पर
मेरा अब हक़ बनता है
पाश
मैंने टिकट ख़र्च कर
तुम्हारे लोकतन्त्र का नाटक देखा है
अब तो मेरा नाटकहॉल में बैठकर
हाय हाय कहने और चीख़ें मारने का
हक़ बनता है
तुम ने भी टिकट देते समय
टके भर की छूट नहीं दी
और मैं भी अपनी पसन्द का बाज़ू पकड़कर
गद्दे फाड़ डालूँगा
और परदे जला डालूँगा













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