दिल्ली के करावल नगर में भगतसिंह के सपनों और आदर्शों को समर्पित ‘शहीद भगतसिंह युवा केन्द्र’ की शुरुआत
23 मार्च 2026, करावल नगर (दिल्ली) ; भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु के 95वें शहादत दिवस के अवसर पर ‘शहीद भगतसिंह युवा केन्द्र’ की शुरुआत की गयी। केन्द्र का उद्घाटन कार्यक्रम रविवार, 22 मार्च को आयोजित किया गया। करावल नगर की जनता के साथ-साथ शहर के न्यायशील नागरिकों और छात्रों ने भी बड़ी संख्या में कार्यक्रम में भागीदारी की। मुख्य अतिथि के तौर पर प्रसिद्ध कवियत्री और राजनीतिक कार्यकर्ता कात्यायनी और वरिष्ठ पत्रकार व कार्यकर्ता सत्यम शामिल हुए। बच्चों और नौजवानों ने भी बढ़-चढ़ कर कार्यक्रम में भागीदारी की। दिल्ली के बुराड़ी स्थित सावित्रीबाई फुले-फ़ातिमा शेख़ पुस्तकालय के नौजवानों और बच्चों की टोली भी कार्यक्रम में शिरकत करने पहुँची।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध क्रान्तिकारी रॉक बैण्ड ‘अनुष्टुप’ द्वारा प्रस्तुत ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ गीत से की गयी। गीत, नारों और शुरुआती बात के बाद रिबन काट कर केन्द्र का उद्घाटन किया गया। गगनभेदी नारों के साथ शहीदों की तस्वीरों पर माल्यार्पण किया गया। बुराड़ी पुस्तकालय से आये बच्चों और नौजवान दोस्तों ने भी इस मौके पर ‘आ रे नौजवान’ गीत की प्रस्तुति दी।
युवा केन्द्र के महत्व और उसकी निर्माण यात्रा पर सनी ने बात रखी। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब क्रान्तिकारियों के सपनों पर धूल की चादर डाली जा रही है, ऐसे संस्थानों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। नौजवान भारत सभा की विरासत को 100 साल पूरे होने कि इस ऐतिहासिक घड़ी में इस केन्द्र की शुरुआत इस बात का प्रतीक है कि जो मशाल भगतसिंह और उनके साथियों ने जलायी थी वो अभी भी बुझी नहीं है। यह केन्द्र शहीदों के सपनों को पूरा करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। साथ ही, इस शुरुआत से प्रेरणा लेते हुए जगह-जगह ऐसे संस्थानो के निर्माण की पहल ली जायेगी। आगे सनी ने बात रखते हुए बताया कि कैसे आज से क़रीब दो दशक पहले जब उन्हें इसी स्थान पर शुरू किये गये शहीद भगतसिंह पुस्तकालय के बारे मे पता चला तो वह और उन जैसे ही कई छात्रों ने मिल कर इस मुहिम से जुड़कर इसे आगे बढ़ाने का फैसला लिया था। पुस्तकालय एक ऐसा केन्द्र बनता चला गया जहाँ केवल विचारों का आदान-प्रदान ही नहीं होता था बल्कि वहाँ से पूरे इलाके में लोगों की ज़िन्दगी से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिये पहल ली जाती थी। आज जब हम इस यात्रा के एक नये चरण में प्रवेश कर रहे हैं तो यह भी यहाँ रहने वाले लोगों के संघर्षों का ही परिणाम है। इस संस्थान की एक-एक ईंट जनसहयोग से लगी है। मौजूदा फ़ासीवादी दौर में जब लोगों के सामने नकली दुश्मन खड़ा कर उन्हें असली मुद्दों से गुमराह किया जा रहा है, उन्हें अपने ही हितों के ख़िलाफ़ खड़ा किया जा रहा है तब इस तरह के केन्द्रों की ज़रूरत पहले से कहीं अधिक हो जाती है। सभा में आगे बच्चों ने सामूहिक गीत की प्रस्तुति दी। ‘हम मेहनत करने वाले सब एक हैं’ गीत के ज़रिये हर क़िस्म के भेद मिटा कर सभी मेहनतकश लोगों को एकजुट होने का संदेश दिया।
लखनऊ से आयी कवयित्री और ऐक्टिविस्ट कात्यायनी ने कहा कि आज यह संस्थान निर्माण और इसके उद्घाटन का दिन हमारे सपनों के साकार होने का दिन है। पिछले 10 वर्षों में दिल्ली जैसे शहर में तमाम बौद्धिक व सांस्कृतिक स्थानों व संस्थाओं को फ़ासीवादी मोदी सरकार ने निशाना बनाया है। दिल्ली जैसा शहर ऐसे ‘स्पेसों’ के लिए जाना जाता था लेकिन ऐसी जगहें व ‘स्पेस’ आज लुप्तप्राय हो चुके हैं। ऐसी जगहें विचारों के आदान-प्रदान, उनके उत्पादक व रचनात्मक घर्षण और जनवादी व प्रगतिशील समुदाय के लोगों के मिलने-जुलने व बहस-मुबाहिसे के केन्द्र हुआ करते थे।
ऐसे तमाम ‘स्पेस’ ख़त्म करने का अर्थ है ऐसे विचारों का गला घोंटना और उनके वाहकों की बौद्धिक हत्या कर देना। चूँकि ऐसी जगहें स्वतन्त्रता, जनवाद, सच्चे सेक्युलरिज़्म, समानता और आलोचनात्मकता के विचारों के पनपने की ज़मीन रही हैं, ठीक इसीलिए मौजूदा फ़ासीवादी निज़ाम ऐसी जगहों को समाप्त करने पर तुला हुआ है। इसलिए मौजूदा दौर में हमें ही इस तरह के केन्द्रों के निर्माण का काम हाथ में लेना होगा। भगतसिंह युवा केन्द्र भी ऐसा ही एक संस्थान है। यह संस्थान प्रगतिशील विचारों को लोगों तक ले जाने के लिए ज़रूरी प्रकाशन संस्थानों और वैकल्पिक मीडिया खड़ा करने के व्यापक कार्यभार का हिस्सा भी है। चारों तरफ़ फैले फ़ासीवादी ज़हर के ख़िलाफ़ संघर्ष आज ऐसे सामाजिक-सांस्कृतिक मुहिम के बिना सम्भव नहीं हैं। ये संस्थान नया समाज बनाने के सपने को संवेग देने का काम करेंगे। अंत में उन्होंने कहा कि आज के दौर में फ़ासीवाद-विरोधी कार्यभारों में यह एक अहम कार्यभार है और फ़ासीवादी ताक़तों को तभी पछाड़ा जा सकता है जब हम तृणमूल स्तर पर ऐसे संस्थानों के ज़रिये लोगों तक सही विचार ले कर जाये।
इसके बाद ‘अनुष्टुप’ के साथियों ने प्रस्तुति दी। हबीब ज़ालिब का गीत ‘दस्तूर’, फ़ैज़ द्वारा रचित ‘चलो फिर से मुस्कुराएँ’ और शशिप्रकाश द्वारा लिखा गया गीत ‘शहीदों के लिए’ गाये गये।
सभा में आगे वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक कार्यकर्ता सत्यम ने बात रखी। उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद से आज तक हमने जो देखा उससे यह और साफ़ हो गया है कि कोई भी बुनियादी बदलाव केवल और केवल इंक़लाब के ज़रिये ही आ सकता है। भगतसिंह न कहा था, “इंक़लाब की तलवार विचारों की सान पर तेज़ होती है”। युवा केन्द्र जैसे संस्थान ही वह सान है जहाँ इंक़लाब की तलवार की धार तेज़ की जा सकती है। उन्होंने कहा कि आज मीडिया समाज को बेहतर दिशा में ले जाने की जगह उसे तबाहो-बर्बाद करने के लिये काम कर रहा है। झूठी ख़बरों के अलावा फ़िल्मों और अन्य सांस्कृतिक माध्यमों के ज़रिये भी लोगों को गुमराह किया जा रहा है। ऐसे में जनवादी स्पेसों का निर्माण और उनके माध्यम से जन-जन तक सच का प्रचार हमारा महत्वपूर्ण कार्यभार बनता है। आख़िर में सत्यम ने क्रान्तिकारी कवि पाश को उनके शहादत दिवस (23 मार्च) पर याद करते हुए उनकी सुप्रसिद्ध कविता ‘सबसे ख़तरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना’ का अंश पढ़ा और कहा कि आज अँधेरे के इस दौर मे हमारे सपने ही हैं जो हमें जीने की और आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। यह केन्द्र भी हमारे सपनों को साकार करने की ओर बढ़ाया गया एक क़दम है।
नौजवान भारत सभा से जुड़े रहे साथी योगेश ने बात रखी। उन्होंने कहा कि यह केन्द्र जनसहयोग के दम पर खड़ा किया गया है। नौभास लम्बे से इलाके में जनजीवन से जुड़े मुद्दों को लेकर संघर्षरत रहा है। आगे योगेश ने केन्द्र की पूरी परियोजना पर बात रखी। उन्होंने बताया कि इस केन्द्र में कुल चार मंज़िलों के निर्माण की योजना है। भूतल पर स्थित सभागार व पुस्तकालय के साथ ही ऊपर ‘आज़ाद यूथ क्लब’ के तहत जिम की शुरुआत की जायेगी। सबसे ऊपर एक ओपेन एयर थिएटर का निर्माण भी किया जाना है। ‘आज़ाद यूथ क्लब’ के तहत केन्द्र में नियमित तौर पर विभिन्न खेल-कूद की गतिविधियों का भी आयोजन किया जायेगा। साथ ही केन्द्र में नियमित तौर पर देश और दुनिया के बेहतरीन सिनेमा को दिखाया जायेगा। ‘शिक्षा सहायता मण्डल’ तथा नियमित तौर पर मेडिकल कैम्प का भी आयोजन किया जायेगा। केन्द्र में जन सहायता व शिकायत केन्द्र का भी संचालन किया जायेगा।
केन्द्र के उद्घाटन के मौके पर आयोजित सभा के अन्त में बच्चों को पुरस्कृत किया गया। मालूम हो कि उद्घाटन से पहले तीन दिनों तक शतरंज, क्विज़ तथा चित्रकला प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था। हर प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पाने वाले बच्चों के साथ ही सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र, क्रान्तिकारियों की पेंटिंग और ‘कोंपल’ बाल पत्रिका भेंट की गयी।
‘अनुष्टुप’ द्वारा संगीतबद्ध और आशु मिश्रा द्वारा लिखित सुप्रसिद्ध गीत ‘कहो नरेंदर मज़ा आ रहा’, जो हाल ही में पूरे देश में ही काफी चर्चा में रहा है, के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ और लोगों का आह्वान किया गया कि देशस्तर पर इस तरह के केन्द्रों के निर्माण के लिए बढ़-चढ़ कर आगे आयें।
मज़दूर बिगुल, मार्च 2026


















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