गुड़गाँव-मानेसर के हड़ताल की लपटें पहुॅंची नोएडा तक!
नोएडा के फेज़ 2 के रिचा ग्लोबल में अपनी जायज़ माँगों को लेकर हुई हड़ताल की शुरुआत!
मानेसर में जारी हड़ताल की लपटें नोएडा की फैक्टरियों तक भी जा पहुँची हैं। नोएडा के फेज़ 2 में रिचा ग्लोबल कम्पनी के मज़दूर अपनी माँगों को लेकर सड़कों पर उतर गये हैं। मज़दूरों की माँग है कि उनको मिलने वाली तनख़्वाह अपर्याप्त है, और इसे बढ़ाया जाये। नोएडा में फैक्टरियों के भीतर श्रम क़ानूनों का पालन नहीं किया जाता है। कम तनख़्वाह की वजह से उन्हें मजबूरन ओवरटाइम करना पड़ता है, जिसका भुगतान सिंगल रेट से किया जाता है। इसके इतर भी अपनी अन्य जायज़ माँगों को लेकर मज़दूर हड़ताल पर चले गये हैं।
ग़ौरतलब है कि अन्तरराष्ट्रीय परिस्थित और मोदी सरकार की लापरवाही और बदइन्तज़ामी के कारण मज़दूरों को तीन से पाँच गुनी क़ीमत पर सिलेण्डर मिल रहा है। कम्पनी प्रबन्धन के ख़िलाफ़ पिछले लम्बे समय से संचित गुस्सा इस तात्कालिक कारण की वजह से फूट पड़ा है। मानेसर के होण्डा में मज़दूरों के संघर्ष को मिली जीत के बाद वहाँ अन्य कम्पनियों में हड़ताल जंगल की आग की तरह फैल गयी। इसके बाद नायब सिंह सैनी सरकार को मज़दूरों की वेतन बढ़ोतरी करने के लिए मजबूर होना पड़ा। लेकिन मज़दूरों की हड़ताल के चेन रिएक्शन से घबरायी इस फ़ासीवादी सरकार ने हड़ताली मज़दूरों का बर्बर दमन किया जिसमें आज कई मज़दूरों को चोटें आयी हैं। इसके बावजूद हड़ताल की लपटें मानेसर से आगे बढ़कर अब नोएडा के मज़दूरों तक पहुँच चुकी है। यह सम्भव है कि हड़तालों का यह चेन रिएक्शन अब देश के अलग-अलग इलाक़ों में भी फैलेगा।
आज देश के मज़दूरों को कम्पनी प्रबन्धनों और उनके हित में काम करने वाली इस सरकार के ख़िलाफ़ एकजुट होना होगा। पहले मानेसर और अब नोएडा के मज़दूरों ने यह एक बार फिर दिखला दिया है कि मज़दूरों की ताक़त के आगे न तो कम्पनी प्रबन्धन टिक सकती है, और न ही इनको संरक्षण देने वाली पुलिस। ‘मज़दूर बिगुल’ नोएडा के मज़दूरों की जायज़ माँगों का समर्थन करता है, और यह माँग करता है कि मज़दूरों की माँगों को तत्काल प्रभाव में पूरा किया जाये।

















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