कौन तोड़ेगा तेरी बेड़ियां
बेर्टोल्ट ब्रेष्ट
कौन तोड़ेगा तेरी बेड़ियां
बतला ऐ गुलाम?
वो जो ग़रकाब है तारीक बयाबानों में
उनके ही कानों में पहुँचेगी तेरी आहो-फुगां
हम-नफस तुझको छुड़ा सकते हैं
जो खुद हों गुलाम…
या तो सब साथ या कोई नहीं
कोई भी नहीं
यो तो हर चीज या फिर
कुछ भी नहीं कुछ भी नहीं
क्या तनहाई बदल सकती है
तेरी तस्वीर?
या तो बन्दूक तेरे वास्ते
या फिर जंजीर!














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