असली कारण को पहचानो

आनन्द, गुड़गाँव

काम की तलाश में घूम रहे हैं लोग,
एक-दूसरे की जाति-धर्म को
दोष दे रहे हैं लोग,
भाई-भतीजे, बुजुर्गों-रिश्तेदारों
को दोष दे रहे हैं लोग,
ऐसा होता, वैसा न होता,
तो बहुत अच्छा होता कहते हैं लोग,
एकबारगी तो मन कहता है,
कि क्या बहुत नादान या मूर्ख
हो गये हैं लोग,
जो समझ नहीं पा रहे कि
ये तो पूंजीवाद है,
इस बेरोजगारी की जिम्मेदार
यह व्यवस्था है,
जल्द से जल्द बदल डालो
इस व्यवस्था को,
नही तो यूं ही मजबूर परेशान
काम की तलाश में,
घूमते रहेंगे हम सब लोग।

मज़दूर बिगुल, जुलाई 2016