दिल्ली में ‘चुनाव भण्डाफोड़ अभियान’ चुनाव में जीते कोई भी हारेगी जनता ही!
दिल्ली विधानसभा के चुनाव के अवसर पर चुनावी नौटंकी का पर्दाफाश करते हुए बिगुल मज़दूर दस्ता, नौजवान भारत सभा, दिल्ली इस्पात उद्योग मज़दूर यूनियन, करावल नगर मज़दूर यूनियन और दिशा छात्र संगठन ने दिल्ली के विभिन्न इलाक़ों में ‘चुनाव भण्डाफोड़’ अभियान चलाया। करावल नगर, खजूरी, मुस्तफ़ाबाद, वजीरपुर औद्योगिक क्षेत्र, पीरागढ़ी, शाहाबाद डेयरी, बवाना, नरेला आदि के मज़दूर क्षेत्रों में तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग और रोहिणी में विशेष तौर पर चलाये गये ‘चुनाव भण्डाफोड़ अभियान’ के तहत बड़े पैमाने पर पर्चे बाँटे गये और नुक्कड़ सभाएँ की गयीं। लोगों से चुनावी नौटंकी के भ्रमजाल से बाहर आने और भगतसिंह के विचारों के
मार्गदर्शन में पूँजीवादी संसदीय ढाँचे का क्रान्तिकारी विकल्प खड़ा करने का आह्नान किया गया। आज़ादी के 67 साल बीत जाने के बाद यह तो साफ हो चुका है कि गैरबराबरी और अन्याय पर टिकी पूँजीवादी व्यवस्था में चुनाव एक धोखा है जिसमें हर बार बस पूँजीपतियों की मैनेजिंग कमेटी बदल जाती है। पूँजीवादी व्यवस्था में जनतंत्र जनता के लिए धनतंत्र, लाठीतंत्र और गुण्डातंत्र के अलावा कुछ नहीं है। हमारे पास यही विकल्प होता है कि हम साँपनाथ-नागनाथ और बिच्छूप्रसाद में से किसी एक को चुन लें। आज ज़रूरत है इस बात को समझने की कि इस या उस चुनावी पार्टी से उम्मीद लगाने की बजाय मज़दूर वर्ग को अपनी क्रान्तिकारी पार्टी खड़ी करनी होगी और मनुष्य द्वारा मनुष्य के लूट पर टिकी इस व्यवस्था को उखाड़कर जनता का अपना राज कायम करने की लड़ाई लड़नी होगी।
कई दशक से जारी इस अश्लील नाटक के पूरे रंगमंच को ही उखाड़ फेंकने का वक़्त आ गया है। इस देश के मेहनतकशों और नौजवानों के पास वह क्रान्तिकारी शक्ति है जो इस काम को अंजाम दे सकती है। बेशक यह राह कुछ लम्बी होगी, लेकिन पूँजीवादी नक़ली जनतन्त्र की जगह मेहनतकश जनता को अपना क्रान्तिकारी विकल्प पेश करना होगा। उन्हें पूँजीवादी जनतन्त्र का विकल्प खड़ा करने के एक लम्बे इंक़लाबी सफ़र पर चलना होगा। यह सफ़र लम्बा तो ज़रूर होगा लेकिन हमें भूलना नहीं चाहिए कि एक हज़ार मील लम्बे सफ़र की शुरुआत भी एक छोटे से क़दम से ही तो होती है!
मज़दूर बिगुल, फरवरी 2015














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